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'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- तेवर जिसका अर्थ है- देखने का ढंग, चितवन, दृष्टि, भौंह, भृकुटि। प्रस्तुत है गोपाल सिंह नेपाली की कविता- जब दर्द बढ़ा तो बुलबुल ने
जब दर्द बढ़ा तो बुलबुल ने, सरगम का घूँघट खोल दिया
दो बोल सुने ये फूलों ने मौसम का घूँघट खोल दिया
बुलबुल ने छेड़ा हर दिल को, फूलों ने छेड़ा आँखों को
दोनों के गीतों ने मिलकर फिर शमा दिखाई लाखों को
महफ़िल की मस्ती में आकर
सब कोई अपनी सुना गए
जब काली कोयल शुरू हुई, पंचम का घूँघट खोल दिया
जब दर्द बढ़ा तो बुलबुल ने, सरगम का घूँघट खोल दिया
धरती से अंबर अलग हुआ, कानों में सरगम लिए हुए
अंबर से धरती अलग हुई, होंठों पर शबनम लिए हुए
तारों से पहरे दिलवाकर
आकाश मिला था धरती से
किरनों का बचपन यों मचला, नीलम का घूँघट खोल दिया
जब दर्द बढ़ा तो बुलबुल ने, सरगम का घूँघट खोल दिया
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47 minutes ago
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