[ad_1]

Gorakhpur Monsoon
– फोटो : अमर उजाला।
ख़बर सुनें
विस्तार
कृषि और खाद्य नीति विशेषज्ञों ने कहा है कि इस मानसून के मौसम में अनियमित बारिश के कारण खरीफ की फसल के उत्पादन में मामूली गिरावट आई है। हालांकि इससे महंगाई बढ़ने या खाद्य सुरक्षा प्रभावित होने की संभावना नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास इससे निपटने के लिए पर्याप्त भंडार है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अनिश्चित मानसून के कारण व्यक्तिगत तौर पर किसान सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। कई किसानों को अभी तक राज्य सरकारों से मदद नहीं मिली है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने बुधवार को पूर्वानुमान जारी किए। इसके मुताबिक, चावल उत्पादक प्रमुख राज्यों में खराब बारिश के कारण उत्पादन 104.99 मिलियन टन तक होने की संभावना है। पिछले साल चावल का उत्पादन 111 मिलियन टन हुआ था।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, गर्मी के मौसम की मुख्य फसल धान के तहत रकबा 3.99 करोड़ हेक्टेयर रह गया है। पिछले साल यह 4.17 करोड़ हेक्टेयर था।
मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत के मुताबिक मानसून के कारण दक्षिण और मध्य भारत में अतिरिक्त बारिश हुई है, जबकि पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत में कम बारिश दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि चावल उत्पादन में अनुमानित गिरावट भारतीय गंगीय मैदानों में बारिश की कमी से जुड़ी है।
मौसम विज्ञानी ने बताया कि सितंबर में देर से बारिश के कारण राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में किसान सोयाबीन, उड़द और मक्का की फसलों को नुकसान होने की जानकारी दे रहे हैं। इन इलाकों में फसलों की कटाई देरी हुई है। हालांकि उन्होंने कहा कि जारी बारिश और मानसून की देरी से उत्तर प्रदेश के किसानों को सरसों की बुवाई में मदद मिलेगी।
22 सितंबर तक उत्तर प्रदेश में सामान्य से 33 फीसदी और बिहार, झारखंड व पश्चिम बंगाल में क्रमश: 30 फीसदी, 20 फीसदी और 15 फीसदी कम बारिश हुई है। 15 जुलाई तक उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में बारिश की कमी क्रमश: 65 फीसदी, 42 फीसदी, 49 फीसदी और 24 फीसदी थी। वहीं गुजरात में 1 जून से 31 फीसदी अधिक वर्षा हुई है, जबकि महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में 26 फीसदी और 24 फीसदी अधिक बारिश हुई है।
पलावल के मुताबिक, आईजीपी में भारी बारिश की कमी असामान्य है और इसे जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
[ad_2]
Source link