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Quad: चीन को क्वाड देशों की परोक्ष चेतावनी, सदस्य देशों के साथ ऐतिहासिक विवाद है कारण

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Quad: चीन को क्वाड देशों की परोक्ष चेतावनी, सदस्य देशों के साथ ऐतिहासिक विवाद है कारण

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सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।
– फोटो : Social media

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चीन के क्वाड देशों के साथ पुराने विवादों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती रणनीतिक चिंताओं के कारण क्वाड देश उसे परोक्ष चेतावनियां भेज रहे हैं। हालांकि इस दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थायित्व, जिसका जिक्र क्वाड संयुक्त वक्तव्य में करता है, बनाए रखा जा रहा है। 

क्वाड सदस्यों में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान सभी के विस्तारवादी नीतियों वाले चीन के साथ ऐतिहासिक विवाद हैं। द डिप्लोमेट पत्रिका के मुताबिक, भारत की चीन के साथ 2167 लंबी सीमा है। चीन के अन्य क्वाड देशों के संबंधों में भी तनातनी है। जापान प्रशासित सेनकाकु और डियाओयू टापू को चीन अपना हिस्सा बताता है। 

सोलोमन द्वीप के साथ चीन का सुरक्षा समझौता ऑस्ट्रेलिया की चिंता का कारण है। क्वाड के चौथे सदस्य दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका के साथ ताइवान जलडमरूमध्य के दर्जे को लेकर तनातनी है। अमेरिका स्पष्ट संदेश देता रहा है कि ताइवान का दर्जा बदलने की कोशिश हुई तो वह अपनी सेना का इस्तेमाल कर सकता है। उधर, चीन ताइवान को अपना हिस्सा करार देता है।

द डिप्लोमेट के मुताबिक, यह विवाद कभी भी बड़े संघर्ष का कारण बन सकते हैं। एक और बात, चीन व ताइवान की सेनाओं की क्षमता में भारी असमानता है। किसी को भी हैरानी हो सकती है कि छोटा सा द्वीप पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से जूझने का साहस रखता है। लद्दाख में भारत-चीन की सीमा केवल वास्तविक नियंत्रण रेखा से तय होती है। नाटो की तरह क्वाड अपने फोरम का इस्तेमाल चारों लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग बढ़ाने में करता है।

सैन्य ही नहीं, कई क्षेत्रों में करते हैं सहयोग
मई-2022 में क्वाड देशों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया कि उनके बीच सहयोग केवल सैन्य नहीं, बल्कि कोविड-19 वैक्सीन की आपूर्ति, जलवायु परिवर्तन चिंताओं से भी संबंधित है। क्वाड को उम्मीद है कि वह विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर वैश्विक मंच पर प्रभुत्व की चीन की मंशा को विफल कर सकता है।

शांतिपूर्ण ढंग से विवाद हल करें भारत-चीन : सिंगापुर
सिंगापुर के विदेश मंत्रालय में राजदूत ओंग केंग योंग ने भारत-चीन दोनों से शांतिपूर्ण ढंग से विवादों को हल करने का आग्रह किया है। वह बोले, चीजों के संचालन पर दो बड़े देशों की अलग-अलग राय होगी। हम अलग-अलग मुद्दों पर अपना-अपना पक्ष रख सकते हैं, लेकिन अंत में, हमें इस चर्चा को बंद कर अच्छा डील करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को बैठना होगा। सभी संभावित परिदृश्यों से गुजरकर एक सामान्य निष्कर्ष निकालना होगा।  उन्होंने भारत-सिंगापुर संबंधों, दक्षिण चीन सागर में आचार संहिता और आक्रामक चीनी नीतियों के बारे में सिंगापुर-आसियान चिंता पर भी चर्चा की।

विस्तार

चीन के क्वाड देशों के साथ पुराने विवादों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती रणनीतिक चिंताओं के कारण क्वाड देश उसे परोक्ष चेतावनियां भेज रहे हैं। हालांकि इस दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थायित्व, जिसका जिक्र क्वाड संयुक्त वक्तव्य में करता है, बनाए रखा जा रहा है। 

क्वाड सदस्यों में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान सभी के विस्तारवादी नीतियों वाले चीन के साथ ऐतिहासिक विवाद हैं। द डिप्लोमेट पत्रिका के मुताबिक, भारत की चीन के साथ 2167 लंबी सीमा है। चीन के अन्य क्वाड देशों के संबंधों में भी तनातनी है। जापान प्रशासित सेनकाकु और डियाओयू टापू को चीन अपना हिस्सा बताता है। 

सोलोमन द्वीप के साथ चीन का सुरक्षा समझौता ऑस्ट्रेलिया की चिंता का कारण है। क्वाड के चौथे सदस्य दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका के साथ ताइवान जलडमरूमध्य के दर्जे को लेकर तनातनी है। अमेरिका स्पष्ट संदेश देता रहा है कि ताइवान का दर्जा बदलने की कोशिश हुई तो वह अपनी सेना का इस्तेमाल कर सकता है। उधर, चीन ताइवान को अपना हिस्सा करार देता है।

द डिप्लोमेट के मुताबिक, यह विवाद कभी भी बड़े संघर्ष का कारण बन सकते हैं। एक और बात, चीन व ताइवान की सेनाओं की क्षमता में भारी असमानता है। किसी को भी हैरानी हो सकती है कि छोटा सा द्वीप पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से जूझने का साहस रखता है। लद्दाख में भारत-चीन की सीमा केवल वास्तविक नियंत्रण रेखा से तय होती है। नाटो की तरह क्वाड अपने फोरम का इस्तेमाल चारों लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग बढ़ाने में करता है।

सैन्य ही नहीं, कई क्षेत्रों में करते हैं सहयोग

मई-2022 में क्वाड देशों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया कि उनके बीच सहयोग केवल सैन्य नहीं, बल्कि कोविड-19 वैक्सीन की आपूर्ति, जलवायु परिवर्तन चिंताओं से भी संबंधित है। क्वाड को उम्मीद है कि वह विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर वैश्विक मंच पर प्रभुत्व की चीन की मंशा को विफल कर सकता है।

शांतिपूर्ण ढंग से विवाद हल करें भारत-चीन : सिंगापुर

सिंगापुर के विदेश मंत्रालय में राजदूत ओंग केंग योंग ने भारत-चीन दोनों से शांतिपूर्ण ढंग से विवादों को हल करने का आग्रह किया है। वह बोले, चीजों के संचालन पर दो बड़े देशों की अलग-अलग राय होगी। हम अलग-अलग मुद्दों पर अपना-अपना पक्ष रख सकते हैं, लेकिन अंत में, हमें इस चर्चा को बंद कर अच्छा डील करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को बैठना होगा। सभी संभावित परिदृश्यों से गुजरकर एक सामान्य निष्कर्ष निकालना होगा।  उन्होंने भारत-सिंगापुर संबंधों, दक्षिण चीन सागर में आचार संहिता और आक्रामक चीनी नीतियों के बारे में सिंगापुर-आसियान चिंता पर भी चर्चा की।



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