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भारतीय रिजर्व बैंक
– फोटो : Social Media
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को कहा है कि सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी पर कॉन्सेप्ट नोट सामान्य रूप से सेंट्रल बैंक की डिजिटल करेंसी (CBDC) और डिजिटल रुपये की नियोजित विशेषताओं के बारे में लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए जारी किया गया है।
दरअसल, RBI जल्द ही विशिष्ट उपयोग के लिए ई-रुपये के इस्तेमाल के लिए पायलट रन करेगा। इससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही भुगतान प्रणाली को अधिक सक्षम बनाया जा सकेगा। इसका एक और मकसद धन शोधन या मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को रोकने में मदद करना भी है।
आरबीआई कुछ समय के लिए सीबीडीसी के फायदे और नुकसान के बारे में आकलन करेगा। इस आधार पर इसके डिजाइन और अन्य मामलों में बदलाव किया जाएगा। बैंकों के जरिये इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। ई-रूपया आ जाने से लोगों को नगद रुपये रखने की जरूरत नहीं होगी। ये भी मोबाइल वॉलेट की तरह काम करेगी। यह एक कानूनी मुद्रा होगी।
ई-रूपी को मोबाइल और वॉलेट दोनों में रखा जा सकेगा
चर्चा पत्र में ई-रूपी के बैकग्राउंड, प्रेरणा, डिजाइन सुविधाओं के विकल्प और अन्य नीतिगत ढांचों को प्रस्तुत किया गया है। इसे मोबाइल और वॉलेट दोनों में रखा जा सकता है। इस साल बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आरबीआई द्वारा डिजिटल करेंसी को लॉन्च करने की घोषणा की थी। सीबीडीसी करेंसी नोट्स के डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में है। भारत सरकार ने आम बजट में वित्त वर्ष 2022-23 से डिजिटल रुपया पेश करने की घोषणा की थी।
आरबीआई ने 51 पन्नों में ड्राफ्ट नोट जारी किया
51 पन्नों के आरबीआई के ड्राफ्ट नोट के अनुसार सीबीडीसी के लिए जल्द ही पायल प्रोजेक्ट शुरू होगा। इसमें अलग-अलग उम्र और अलग-अलग फील्ड के लोग शामिल होंगे। पायलट प्रोजेक्ट से मिले नतीजों के आधार पर डिजिटल रुपये की लाॅन्चिंग होगी। आरबीआई की ओर से जारी इस कन्सेप्ट नोट के अनुसार रीटेल और होलसेल के लिए अलग-अलग CBDC आ सकती है।
सैद्धांतिक तौर पर डिजिटल रुपये को नकदी में बदला जा सकेगा
रीटेल CBDC का इस्तेमाल पेमेंट, सेटलमेंट वगैरह में हो सकता है। वहीं होलसेल CBDC बड़े वित्तीय संस्थानों के लिए जारी की जाएगी। रिटेल के लिए टोकन आधारित CBDC मुमकिन है। वहीं होलसेल के लिए अकाउंट आधारित CBDC लाई जा सकती है। रीटेल CBDC में गोपनीयता बनाए रखने की कोशिश होगी। वहीं, सीबीडीसी के ग्राहकों को किसी तरह कोई ब्याज नहीं मिलेगा। इस ड्रॉफ्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा डिनॉमिनेशन वाली करेंसी पर ही सीबीडीसी का लॉन्च संभव है और सैद्धांतिक तौर पर डिजिटल रुपये को नकदी में बदला जा सकेगा। इसे यूपीआई आधारित पेमेंट सिस्टम से भी जोड़ा जा सकेगा।
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