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Religious Conversion: धर्म बदलने के बाद भी क्या दलितों को मिलेगा आरक्षण? तीन बिन्दुओं में समझें सारे नियम

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Religious Conversion: धर्म बदलने के बाद भी क्या दलितों को मिलेगा आरक्षण? तीन बिन्दुओं में समझें सारे नियम

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धर्मांतरण और आरक्षण

धर्मांतरण और आरक्षण
– फोटो : अमर उजाला

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दशहरे के दिन आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने एक बड़ा आयोजन कराया। इसमें दावा किया गया कि दस हजार लोगों ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया। इस बीच, केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालकृष्णन की अध्यक्षता में एक आयोग गठित कर दिया। यह आयोग तय करेगा कि क्या धर्मांतरण के बाद भी दलितों को आरक्षण का लाभ मिले? आइए जानते हैं कि इसे लेकर संविधान क्या कहता है? 
 

1. अभी संविधान में क्या है नियम? 
धर्मांतरण के बाद आरक्षण को लेकर अभी भी नियम है। संविधान (एससी) आदेश, 1950 कहता है कि हिंदू या सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता है। मतलब अभी सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के लोग आरक्षण और दूसरी सुविधाओं का फायदा उठा सकते हैं। मूलतः संविधान में हिन्दू धर्म के एससी समुदाय के लिए आरक्षण की व्यवस्था थी। बाद में 1956 में इसे सिख और 1990 में बौद्ध के लिए भी जोड़ दिया गया।

अगर कोई इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाता है, तो उसे आरक्षण और अन्य दूसरी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता है। हां, अगर वह फिर से हिंदू धर्म में आ जाता है, तो उसे लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। इसी को लेकर विवाद है। लंबे समय से मुस्लिम और ईसाई समूहों की मांग है कि उन दलितों के लिए आरक्षण की समान स्थिति रखी जाए, जिन्होंने उनका धर्म अपना लिया है। इसी पर फैसला करने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में एक कमेटी का गठन किया है। 
 
2. क्या अब धर्म बदलने के बाद भी आरक्षण का लाभ मिलने लगेगा? 
यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से अपना स्टैंड क्लियर करने को बोला था। यही कारण है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस के. जी. बालकृष्णन की अगुआई में एक कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी का कार्यकाल दो साल का होगा। ये कमेटी अध्ययन करके रिपोर्ट तैयार करेगी कि दलित से ईसाई या फिर इस्लाम धारण करने वालों को क्या आरक्षण का लाभ दिया जाए या नहीं? 
 
3. अगर नियम बदलता है तो किसे होगा फायदा?
अगर कमेटी इस्लाम या ईसाई बनने वाले दलितों को एसी का दर्जा देने की संतुति करती है तो इसका लाभ दलित ईसाई और दलित मुस्लिम को मिलने लगेगा। इनकी संख्या दो लाख से ज्यादा बताई जा रही है। अभी तक केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के आरक्षित वर्ग को ही इसका लाभ मिलता था। 
 
तो बौद्ध बनने वाले लोगों को मिलेगा आरक्षण का लाभ? 
ये सवाल हमने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रप्रकाश पांडेय से पूछा। उन्होंने कहा, ‘अगर आरक्षित वर्ग से कोई बौद्ध धर्म अपनाता है तो उसे आरक्षण का लाभ जरूर मिलेगा। हालांकि, अनारक्षित वर्ग का अगर कोई बौद्ध बनता है तो उसे इसका लाभ नहीं मिलेगा।’

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दशहरे के दिन आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने एक बड़ा आयोजन कराया। इसमें दावा किया गया कि दस हजार लोगों ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया। इस बीच, केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालकृष्णन की अध्यक्षता में एक आयोग गठित कर दिया। यह आयोग तय करेगा कि क्या धर्मांतरण के बाद भी दलितों को आरक्षण का लाभ मिले? आइए जानते हैं कि इसे लेकर संविधान क्या कहता है? 

 



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