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रिलेशनशिप में दिक्कते मानसिक विकारों को बढ़ाती हैं, जो शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।
– फोटो : amar ujala
विस्तार
Medically reviewed by-
डॉ विधि.एम.पिलानिया
मनोचिकित्सक (पीएचडी एम्स दिल्ली)
फैकल्टी बीएसएफ
पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं बढ़ रही हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ रही मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में लोगों को जागरूक करने और मानसिक विकार के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए हर साल 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए इसे प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में पता होना चाहिए।
एक शोध के मुताबिक, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कुछ सामान्य कारक ‘अवसाद, चिंता और मूड स्विंग्स’ हैं। इस तरह की स्थिति भावनात्मक तनाव, ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के कारण हो सकती है। जब लोग रिश्ते में असफलता का सामना करते हैं, ब्रेकअप या तलाक की स्थिति में पहुंचते हैं तो चिंता, अवसाद और आत्महत्या समेत कई तरह की मानसिक विकारों का खतरा बढ़ सकता है। मानसिक विकार की स्थिति में लोग नकारात्मकता की ओर चले जाते हैं। प्यार में धोखा, तलाक या टॉक्सिक रिलेशनशिप से परेशान लोगों के सामाजिक जीवन पर बुरा असर पड़ने लगता है। साथ ही शारीरिक तौर पर भी कई बुरे प्रभाव देखने को मिलते हैं। हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा भी मानसिक विकारों के कारण बढ़ जाता है।
लोगों को पता नहीं होता कि उनका टूटा हुआ रिश्ता या टॉक्सिक रिलेशनशिप उन्हें मनोरोग की ओर ले जा रहा है। वह इस समस्या से निकलने का सही तरीका नहीं समझ पाते।
मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर जानिए रिश्ते में आने वाली दिक्कतों से मानसिक सेहत और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर और इससे बाहर निकलने के सही तरीकों के बारे में।
रिश्तों में तनाव का मानसिक स्वास्थ्य पर असर कितना गंभीर?
सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे एक अभ्यर्थी ने बताया कि जब उनका ब्रेकअप हुआ तो वह कई महीनों तक काफी तनाव में रहे। उनका पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगता था। ऐसे में वह करियर और अपने लक्ष्य से कुछ समय के लिए पूरी तरह से भटक गए। इसके अलावा जो लोग लंबे समय से उनके साथ थे, ब्रेकअप के बाद उन्होंने उन दोस्तों से दूरी बना ली। वह अपना अधिकतर वक्त कमरे में बंद रहकर बिताते थे। लोगों से मिलना जुलना बहुत कम हो गया था।
स्पष्ट है कि मानसिक स्थिति का असर सामाजिक जीवन में दिखने लगता है। अपने लक्ष्य और दोस्तों से दूरी अकेलेपन की ओर ले जाता है। यही अकेलापन अनिद्रा और तनाव बढ़ाता है, जिसके कारण अवसाद का खतरा हो सकता है।
खुद को व्यस्त रखें
मनोचिकित्सक डॉ विधि बताती हैं कि रिलेशनशिप टूटता है तो व्यक्ति की पूरी दिनचर्या पर असर पड़ता है। चूंकि जब आप रिलेशनशिप में होते हैं, तो ज्यादा से ज्यादा वक्त अपने पार्टनर को दे रहे होते हैं। लोगों को समझ नहीं आता कि जो वक्त वह अपने पार्टनर के साथ बिता रहे होते हैं, उस वक्त पर बिना पार्टनर के अकेले में क्या करें। पार्टनर की आदत लग गई होती है। ऐसे में इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए जितना ज्यादा हो सके, खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करनी चाहिए।
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