Home Breaking News Haryana: 23 अक्तूबर तक हड़ताल पर 32 हजार कर्मचारी, कामकाज पर बुरा असर, सरकार ने एस्मा लागू किया

Haryana: 23 अक्तूबर तक हड़ताल पर 32 हजार कर्मचारी, कामकाज पर बुरा असर, सरकार ने एस्मा लागू किया

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Haryana: 23 अक्तूबर तक हड़ताल पर 32 हजार कर्मचारी, कामकाज पर बुरा असर, सरकार ने एस्मा लागू किया

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सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।
– फोटो : Amar Ujala Digital

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हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय विभाग के करीब 32 हजार कर्मचारी 23 अक्तूबर तक हड़ताल पर हैं। हड़ताल में करीब 26 हजार सफाई कर्मचारी, चालक, इलेक्ट्रिशन, चौकीदार, सहायक, सफाई निरीक्षक, सीवरमैन, वॉटर सप्लाई, लिपिक, दरोगा, बेलदार, माली और दूसरे कर्मचारी शामिल हैं। इससे 10 नगर निगमों, 16 नगर परिषदों और 61 पालिकाओं में कामकाज पर बुरा असर पड़ रहा है। लोगों की परेशानी को देखते हुए हरियाणा सरकार ने एस्मा लागू कर दिया है। 

सर्व कर्मचारी संघ का कहना है कि सफाई कर्मियों को पक्का करने,15 हजार न्यूनतम वेतनमान, आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग है। कर्मचारियों का कहना है कि चार साल बीत जाने के बाद सरकार ने वादा पूरा नहीं किया है। मांगों को लेकर आंदोलन करते हैं तो लाठीचार्ज किया जाता है। कर्मचारी नेताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज कर दूर दराज तबादले कर आंदोलन को दबा दिया जाता है। ईपीएफ व ईएसआई के करोड़ों रुपये के घोटाले की विजिलेंस जांच नहीं कराई जा रही। फायर समेत सभी अन्य श्रेणियों से ठेका प्रथा समाप्त नहीं की जा रही। 

विस्तार

हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय विभाग के करीब 32 हजार कर्मचारी 23 अक्तूबर तक हड़ताल पर हैं। हड़ताल में करीब 26 हजार सफाई कर्मचारी, चालक, इलेक्ट्रिशन, चौकीदार, सहायक, सफाई निरीक्षक, सीवरमैन, वॉटर सप्लाई, लिपिक, दरोगा, बेलदार, माली और दूसरे कर्मचारी शामिल हैं। इससे 10 नगर निगमों, 16 नगर परिषदों और 61 पालिकाओं में कामकाज पर बुरा असर पड़ रहा है। लोगों की परेशानी को देखते हुए हरियाणा सरकार ने एस्मा लागू कर दिया है। 

सर्व कर्मचारी संघ का कहना है कि सफाई कर्मियों को पक्का करने,15 हजार न्यूनतम वेतनमान, आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग है। कर्मचारियों का कहना है कि चार साल बीत जाने के बाद सरकार ने वादा पूरा नहीं किया है। मांगों को लेकर आंदोलन करते हैं तो लाठीचार्ज किया जाता है। कर्मचारी नेताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज कर दूर दराज तबादले कर आंदोलन को दबा दिया जाता है। ईपीएफ व ईएसआई के करोड़ों रुपये के घोटाले की विजिलेंस जांच नहीं कराई जा रही। फायर समेत सभी अन्य श्रेणियों से ठेका प्रथा समाप्त नहीं की जा रही। 



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