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पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह
– फोटो : अमर उजाला
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गुजरात में 15 प्रतिशत वोट बैंक के सहारे आदिवासी मतदाता सरकार बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। आदिवासियों के लिए आरक्षित 27 विधानसभा सीटों के आलावा भी लगभग दो दर्जन सीटों पर इनका प्रभाव है। यही कारण है कि कांग्रेस अपने इस पारंपरिक वोट बैंक को संभालने के लिए सक्रिय हो गई है तो भाजपा भी आदिवासी गौरव यात्रा निकालकर इन्हें अपने पाले में लाने की कोशिशें शुरू कर चुकी है। इस बार विधानसभा चुनाव में यह वर्ग किस दल को वोट करेगा, इस पर सबकी नजरें लगी हुई हैं।
राज्य के आदिवासी मतदाताओं पर लंबे समय तक कांग्रेस की मजबूत पकड़ हुआ करती थी। लेकिन 1990 के बाद इस वोट बैंक में बंटवारा हो गया। आज भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इस वोट बैंक के अपने साथ होने का दावा करती हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी भी इन मतदाताओं पर दावेदारी जताने के लिए मैदान में है। ऐसे में माना जा रहा है कि मतदाताओं के थोड़े से बंटवारे से भी चुनाव परिणाम किसी भी पक्ष में मुड़ सकता है।
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