Home Breaking News MP News: सतना में लगा गधों का मेला, ‘कैटरीना’ बिकी एक लाख में तो ‘सलमान’ की बोली लगी 60 हजार

MP News: सतना में लगा गधों का मेला, ‘कैटरीना’ बिकी एक लाख में तो ‘सलमान’ की बोली लगी 60 हजार

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MP News: सतना में लगा गधों का मेला, ‘कैटरीना’ बिकी एक लाख में तो ‘सलमान’ की बोली लगी 60 हजार

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मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट में तीन दिवसीय गधों-खच्चरों का मेला लगाया गया। इसमें दूर-दूर से लोग खरीदारी करने आते हैं। इस बार के मेले में कैटरीना और सलमान नाम के खच्चरों की बढ़िया बोली लगी। कैटरीना एक लाख में तो सलमान को 60 हजार में बेचा गया। 

बता दें कि सतना जिले के चित्रकूट में दीपावली के बाद तीन दिवसीय मेला शुरू होता है। खास बात है कि यहां गधों और खच्चरों का बड़ा व्यापार होता है। यहां दूरदराज से गधे और खच्चर बेचने को लाए जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक इस बार के मेले में 10 हजार से ज्यादा गधे और खच्चर आए। यहां आए मवेशियों के नाम भी रोचक होते हैं। कैटरीना, सलमान के साथ ही इस मेले में सुष्मिता, आमिर, गब्बर, आदि नाम के भी खच्चर भी बिकने आए थे।

 

बता दें कि मेले में खरीददार भी कई जगहों से आते हैं। उन्हें कम कीमत में तंदुरुस्त गधे और खच्चर मिल जाते हैं। ओमप्रकाश निवासी बांदा ने बताया कि मेले में ज्यादातर लोग उत्तर प्रदेश के जिलों से हैं। मैं यहां 15 सालों से आ रहा हूं। इस बार एक लाख रुपये में दो खच्चर खरीदे हैं। मेले में कई तरह के खच्चर मिल जाते हैं इसलिए यहां आना जरूरी होता है। फतेहपुर से आए गधा व्यापारी फैयाज बताते हैं कि चित्रकूट के मेला में गधों के हिसाब से बढ़िया कीमत मिल जाती है। इससे हमारा आने-जाने का खर्चा आदि के अलावा अच्छी खासी कीमत मिल जाती है। खच्चर की मांग ज्यादा रहती है जबकि गधे की कम। खच्चर जहां 40 से 50 हजार में बिकता है वहीं गधों की कीमत 10-15 हजार तक रहती है।

 

फिल्मी नाम लुभाने के लिए

इस मेले में कई गधों और खच्चरों का नामकरण कर दिया जाता है। ग्राहकों को लुभाने के लिए फिल्मी सितारों के नाम काफी समय से रखा जा रहा है। ठेकेदार सनी पांडेय ने बताया कि यह औरंगजेब के जमाने का मेला है जो अभी भी चल रहा है। लोग जैसा कि बताते है कि औरंगजेब जब युद्ध के लिए आगे बढ़ रहा था तो वह मंदाकिनी तट पर विश्राम के लिए रुका हुआ था। उसके लश्कर में खच्चर और गधे भी थे जो बीमार हो गए थे, उनकी बिक्री और नए गधे खरीदने के लिए मेला लगाया गया था तब से यह परंपरा चली आ रही है।



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