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इमरान खान और नवाज शरीफ
– फोटो : Social media
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पाकिस्तान के अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार को राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए उन पर उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी और शक्तिशाली सेना के बीच संघर्ष की साजिश रचने का आरोप लगाया। मार्च के जरिए हकीकी आजादी (वास्तविक स्वतंत्रता) हासिल करने का दावा करने वाले इमरान खान ने यह भी कहा कि वह देश की सेना के खिलाफ नहीं हैं। अपने विरोध मार्च के पांचवें दिन की शुरुआत में गुजरांवाला में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए इमरान खान ने अपने राजनीतिक विरोधियों पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ अपने ट्रेडमार्क तीखे हमले को जारी रखे। इमरान खान ने आरोप लगाया कि वे देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी पीटीआई और सेना के बीच टकराव की साजिश रच रहे हैं।
इमरान बोले- नवाज शरीफ, मैं आपको चुनौती देता हूं…
इमरान ने कहा, नवाज शरीफ, मैं आपको चुनौती देता हूं, जब आप वापस आएंगे तो मैं आपको आपके ही निर्वाचन क्षेत्र में हरा दूंगा। उन्होंने तीन बार के पूर्व प्रधानमंत्री को चेतावनी दी कि जब वह पाकिस्तान लौटेंगे, तो हम आपको हवाई अड्डे से अदियाला जेल ले जाएंगे। इमरान खान ने पूर्व राष्ट्रपति और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता जरदारी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें सिंध में अपने आगमन के लिए तैयार हो जाना चाहिए जो कि भुट्टो-जरदारी परिवार का पारंपरिक गढ़ है। उन्होंने कहा, जरदारी ध्यान से सुनो, मैं सिंध आ रहा हूं।
नवाज शरीफ ने इमरान के लॉन्च मार्च का उड़ा मजाक
नवाज शरीफ ने लंबे मार्च के लिए इमरान खान का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि पीटीआई 2,000 लोगों को भी इकट्ठा नहीं कर सकी, जबकि यह दावा किया गया कि वह दस लाख प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा करेगी। शरीफ ने सोमवार रात ट्वीट किया, लोगों की उदासीनता की वजह गलत झूठ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इमरान खान ने लगातार इतना झूठ बोला था कि जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस प्रमुख को अपनी चुप्पी तोड़ने और देश को सच बताने के लिए मजबूर होना पड़ा। शरीफ ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को सूचित किया था कि वह खान की किसी भी मांग को न सुनें, चाहे वह कितने भी लोगों को लाए।
आईएसआई प्रमुख का इमरान पर निशाना
आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अहमद अंजुम ने गुरुवार को कहा था कि सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को मार्च में इमरान खान के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक आकर्षक प्रस्ताव दिया था। इमरान ने स्वीकार किया कि उन्होंने सेना प्रमुख के कार्यकाल में विस्तार की पेशकश की लेकिन कहा कि वह बाकी बातों पर चुप रहेंगे क्योंकि वह देश और इसकी संस्थाओं को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं। 2018 में एक नया पाकिस्तान बनाने के वादे के साथ सत्ता में आए इमरान ने पिछले साल आईएसआई प्रमुख की नियुक्ति का समर्थन करने से इनकार करने के बाद स्पष्ट रूप से शक्तिशाली सेना का समर्थन खो दिया था। अंत में इमरान सहमत हो गए थे, लेकिन उन्होंने सेना के साथ अपने संबंधों को खराब कर दिया, जिसने अपने 75 वर्षों के अस्तित्व के आधे से अधिक समय तक तख्तापलट की आशंका वाले देश पर शासन किया है और अब तक सुरक्षा और विदेश नीति के मामलों में अपनी काफी शक्ति का इस्तेमाल किया है।
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