[ad_1]
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से लोग आंखों में जलन और सांसों की जकड़न से परेशान हैं। सुबह और शाम के समय स्थिति ज्यादा गंभीर हो रही है। डॉक्टरों की माने तो प्रदूषण बढ़ने के साथ ही अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या 30 फीसदी तक बढ़ गई है। अस्पताल पहुंच रहे बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं सांस लेने की तकलीफ से परेशान हैं। वहीं, बुजुर्गों की आंखों में सूखापन आ रहा है, जबकि बच्चों की आंखों में एलर्जी के कारण लालपन, पानी आना, चुभन जैसी समस्याएं देखने को मिल रही है।
आंखों की समस्या के बारे में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में नेत्र विज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. नम्रता शर्मा ने कहा कि प्रदूषण के कारण लोगों में सूखापन और एलर्जी देखने को रही है। एलर्जी के मामले बच्चों या कम उम्र के लोगों में देखने को मिल रही है।
ओपीडी में बढ़े मरीज
एम्स की ओपीडी में खांसी, गले में खराश और दमा की शिकायत के साथ आ रहे मरीजों की संख्या बढ़ गई है। एम्स के सांस रोग विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर करण मदान का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में प्रदूषण की वजह से उनकी ओपीडी में इससे जुड़े मरीजों की संख्या 20 से 25 फीसदी तक बढ़ गई है।
प्रदूषण में इजाफा होने के कारण गले में खराश, सांस लेने पर छाती में भारीपन जुकाम-खांसी, बदन और सर दर्द के मामले 30 फीसदी बढ़ गए हैं। डॉक्टर करण ने बताया कि अधिकतर मरीज तो ऐसे हैं जिन्हें पहले से अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियां थीं लेकिन ऐसे लोग भी अस्पताल आए हैं जिन्हें पहले सांस की कोई समस्या नहीं थी।
साइलेंट किलर है प्रदूषण : डॉ. गुलेरिया
एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि प्रदूषण साइलेंट किलर है। प्रदूषण से लोगों की मृत्यु हो रही है और जीवन स्तर भी कम हो रहा है। प्रदूषण का गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भ में पल रहे बच्चों पर भी इसका बुरा असर होता है। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों, सांस, हृदय और अन्य बीमारियों से परेशान मरीजों को प्रदूषण वाले क्षेत्र में जाने से बचने की सलाह दी है।
[ad_2]
Source link