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रूस यूक्रेन संघर्ष: रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर हमला किया था। युद्ध के आगाज ने दावा किया था कि उसने एक हफ्ते में यूक्रेन में जीत हासिल कर ली है, लेकिन अब इस युद्ध को लगभग 9 महीने हो गए हैं। इसके बाद भी रूस यूक्रेन को हरा नहीं मिला। इस युद्ध में रूस को उम्मीद से कई गुना अधिक नुकसान होगा। उनके 50 हजार से ज्यादा सैनिक हताहत हुए हैं। इसमें सबसे बड़ी खराबी रूस के टैंक और टापों का फेल होना है। इन 9 महीनों में रूस के सैकड़ों तोप और टैंक बर्बाद हो गए हैं। तोपों, मिसाइलों और मिसाइलों से मिलकर बने रूस के इस तोपखाना को ‘युद्ध के देवता’ कहा जाता था। आधुनिक पश्चिमी धारणा से यूक्रेन की सेना ने रूसी युद्ध के देवता को बेदम कर दिया है। इस किस्मत ने भारत की टेंशन भी बढ़ा दी है। आइए जानते हैं रूस का आखिरी साथी होने से भारत क्यों परेशान है।
अमेरिकी हथियार के आगे रूसी तोप फेल
बता दें कि इन मरे हुए तोपखाने की मदद से वर्ष 1943 में रूस ने हिटलर की सेना को ढेर कर दिया था। इसी सफलता पर सोवियत संघ के पूर्व तानाशाह जोसेफ स्टालिन ने इस तोपखाने को ‘युद्ध के देवता’ करार दिया था। पिछली सफलता को देखते हुए ही यूक्रेन से युद्ध में भी तोपखाना रेजिमेंट को छोड़ दिया, लेकिन इस बार उसे सिर्फ हार ही मिली है। रिपोर्ट के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने यूक्रेन पर तोपों, मिसाइलों और मिसाइलों की मदद से कई हमले किए। रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने युद्ध के पहले 10 दिन में ही 1100 मिसाइल दागे, जबकि इस महीने वह हर दिन युद्ध में तोपों से 20 हजार गोले दाग रहा है। दूसरी ओर यूक्रेन के जवाबी कार्रवाई में 4-7 हजार गोले रोज निकल रहे हैं। इस दौरान रूस ने भी यूक्रेन को मैट नहीं पाया, जबकि उसके कम व्यवहार से भी यूक्रेन ने रूस को काफी नुकसान पहुंचाया है। यूक्रेन ये करिश्मा अमेरिका से हिमाकर रॉकेट सिस्टम के जरिए मिला है।
इसलिए बढ़ी है भारत की चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास मौजूदा समय में रूस से कई हथियार हैं। इनमें तोप और रॉकेट भी शामिल हैं। ऐसे में रूस की किस्मत ने भारत के सामने भी इन देरी की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े कर दिए। भारत पिछले कई सालों से अपनी तोपों को आधुनिक बनाने लगा है। अभी भारत अभी आर्टिलरी की कमी से जूझ रहा है। भारत के पास वर्तमान आधुनिक तोपों की कमी है। जबकि उनके सामने चीन जैसे शक्तिशाली देश की चुनौती है। पाकिस्तान भी भारत के लिए बड़ा खतरा है।
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