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Russia: जापान-रूस के बीच फिर बढ़ सकता है तनाव, पुतिन की सेना ने कुरील द्वीप पर लगाया मिसाइल सिस्टम

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Russia: जापान-रूस के बीच फिर बढ़ सकता है तनाव, पुतिन की सेना ने कुरील द्वीप पर लगाया मिसाइल सिस्टम

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सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : PTI

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रूस और जापान के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ने के पूरे आसार हैं। दरअसल, यह तनाव रूस के उकसावे भरे कदम के बाद आया है। बताया जा रहा है कि रूस ने जापान के नजदीक विवादित कुरील द्वीप पर मिसाइल सिस्टम की तैनाती कर दी है। रूस के इस कदम से विवाद बढ़ सकता है। बता दें कि कुरील द्वीप जापान और रूसी कमचटका प्रायद्वीप के बीच फैले द्वीपों की रणनीतिक रूप से स्थित श्रृंखला का हिस्सा है जो कि विश्वयुद्ध के समय से ही विवादों में है। जापानी इन द्वीपों को ‘उत्तरी क्षेत्र’कहते हैं जबकि रूस उन्हें ‘कुरिल’ कहता है। इन द्वीपों पर जापान और रूस के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। लगभग 20 वर्षों में पहली बार जापान ने द्वीपों को ‘अवैध रूप से कब्ज़े वाले क्षेत्र’ के रूप में वर्णित किया है।

क्या है विवाद?
यह विवाद द्वितीय विश्व युद्ध के अंत के समय का है। रूस का दावा है कि चूंकि, उसने द्वितीय विश्व युद्ध में इस द्वीप को जीता था, इसलिए इसका स्वामित्व उसका है। वहीं जापान का कहना है कि जापानियों ने इन द्वीपों की यात्रा 16वीं शताब्दी में की थी जो रूसियों के आगमन से लगभग 200 वर्ष पहले की है, इसलिए द्वीप उनके अधिकार क्षेत्र में हैं। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद, जापान ने मित्र देशों की सेना के साथ 1951 की सैन फ्रांसिस्को शांति संधि पर हस्ताक्षर किए, जहां जापान ने कुरील द्वीप समूह के सभी अधिकार, दावा  को त्याग दिया।

विस्तार

रूस और जापान के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ने के पूरे आसार हैं। दरअसल, यह तनाव रूस के उकसावे भरे कदम के बाद आया है। बताया जा रहा है कि रूस ने जापान के नजदीक विवादित कुरील द्वीप पर मिसाइल सिस्टम की तैनाती कर दी है। रूस के इस कदम से विवाद बढ़ सकता है। बता दें कि कुरील द्वीप जापान और रूसी कमचटका प्रायद्वीप के बीच फैले द्वीपों की रणनीतिक रूप से स्थित श्रृंखला का हिस्सा है जो कि विश्वयुद्ध के समय से ही विवादों में है। जापानी इन द्वीपों को ‘उत्तरी क्षेत्र’कहते हैं जबकि रूस उन्हें ‘कुरिल’ कहता है। इन द्वीपों पर जापान और रूस के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। लगभग 20 वर्षों में पहली बार जापान ने द्वीपों को ‘अवैध रूप से कब्ज़े वाले क्षेत्र’ के रूप में वर्णित किया है।

क्या है विवाद?

यह विवाद द्वितीय विश्व युद्ध के अंत के समय का है। रूस का दावा है कि चूंकि, उसने द्वितीय विश्व युद्ध में इस द्वीप को जीता था, इसलिए इसका स्वामित्व उसका है। वहीं जापान का कहना है कि जापानियों ने इन द्वीपों की यात्रा 16वीं शताब्दी में की थी जो रूसियों के आगमन से लगभग 200 वर्ष पहले की है, इसलिए द्वीप उनके अधिकार क्षेत्र में हैं। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद, जापान ने मित्र देशों की सेना के साथ 1951 की सैन फ्रांसिस्को शांति संधि पर हस्ताक्षर किए, जहां जापान ने कुरील द्वीप समूह के सभी अधिकार, दावा  को त्याग दिया।



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