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विदेश में रह रहे भारतीयों द्वारा भेजी गई राशि का ब्योरा।
– फोटो : Amar Ujala
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2020 में भारतीय प्रवासी रिकॉर्ड मात्रा में पैसे घर भेज रहे थे। उस वर्ष प्रवासियों ने करीब 80 अरब डॉलर भारत भेजे। महामारी के बीच भी प्रवासियों की ओर से पैसों का आना लगातार जारी रहा। विदेशों जो पैसा भारत आ रहा था उसका अधिकांश हिस्सा खाड़ी देशों में स्थित अपनी संपत्ति बेचकर आने वालों का था। उस दौरान महामारी जोरों पर थी। तेल की कीमतें गिर रही थीं। लोगों की नौकरियां जा रही थीं। ऐसे में बाहर बसे लोग अपनी संपत्तियों को बेचकर देश लौटना मुनासिब समझ रहे थे। ये लोग पूरी तरह से आश्वस्त नहीं थे कि ये लोग कभी वापस जा भी सकेंगे या नहीं। ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि भविष्य में विदेशों से भेजी जाने वाली राशि में कमी आएगी। हालांकि ये अनुमान गलत निकले।
विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में आरबीआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि इस साल प्रवासियों की ओर से भारत भेजी गई रकम रिकॉर्ड 100 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। दुनिया भर में फैले एक करोड़ 80 लाख से अधिक प्रवासी वर्ष 2022 में रिकॉर्ड राशि अपने घर भेज सकते हैं। तो, सवाल यह है कि आखिर इस उछाल का क्या कारण है और यह पैसा कहां से आ रहा है? शुरुआत करते हैं खाड़ी देशों से भेजी जाने वाली राशि से। भारत में भेजी जाने वाली कुल राशि में इसका 30% हिस्सा है और हम यहां और तेजी देख रहे हैं। माना कि 2020 में मध्य पूर्व के देशों में कई प्रवासियों ने अपनी नौकरी खो दी, लेकिन इन देशों की अर्थव्यवस्था काफी जल्दी खुल गई। तेल की कीमतों में भी जल्द ही उछाल आई। श्रम की मांग भी बढ़ने लगी। खाड़ी देशों में मुद्रास्फीति दुनिया के अधिकांश हिस्सों की तुलना में सीमित रही। लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा था और उन्होंने इसका कुछ हिस्सा अपने घर यानी भारत भेजा।
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