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Chanda Kochhar
– फोटो : सोशल मीडिया
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चंदा कोचर को एक दौर में भारतीय बैंकिंग जगत की सबसे ताकतवर शख्सियत माना जाता था। देश में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई को इसकी वर्तमान स्थिति में पहुंचाने का श्रेय कोचर को ही दिया जाता है। आईसीआईसीआई यानी इंडस्ट्रियल क्रेडिट एवं इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन को चंदा ने 1984 में तब ज्वाइन किया था जब यह बैंक नहीं बना था। उस समय कोचर मैनेजमेंट ट्रेनी थीं। 22 की उम्र में नौकरी शुरू करने वाली कोचर सिर्फ 47 साल की उम्र में उसी कंपनी में सीईओ बन गई थीं।
उनके कॅरिअर ने 1990 के दशक में तब उछाल ली जब आईसीआईसीआई ने बैंकिंग क्षेत्र में कदम रखा। कोचर को इस बैंक की कोर टीम में शामिल किया गया। इस दस साल में वह ट्रेनी से सहायक जनरल मैनेजर बना दी गईं और अगले दो साल में डिप्टी जनरल मैनेजर के पद पर पहुंच गईं। उनकी तरक्की की रफ्तार किसी के लिए भी ईर्ष्या की वजह हो सकती है क्योंकि डिप्टी जनरल मैनेजर से डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर तक पहुंचने में उन्हें सिर्फ 10 साल और लगे।
इस दौरान उनके पास बैंक के कॉरपोरेट और रिटेल बैंकिंग का जिम्मा था जिसे उन्होंने बखूबी संभाला। एक साल उन्होंने बैंक का अंतरराष्ट्रीय कारोबार और डेढ़ साल मुख्य वित्तीय अधिकारी का पद संभाला। उनके नेतृत्व में बैंक ने 2003-05 तक लगातार उत्कृष्ट रिटेल बैंकिंग का पुरस्कार जीता।
जीवन का चरमोत्कर्ष
2009 में बैंक की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनी, जो भारत में किसी बैंक की सीईओ बनने वाली पहली महिला थीं। फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें पहली बार दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं की सूची में शामिल किया और वह 20वें स्थान पर थीं। भारत में सोनिया गांधी के बाद उन्हें दूसरा स्थान मिला था।
पतन
2018 में पहली बार एक मीडिया समूह ने एक गुमनाम शख्स की शिकायत पर जांच की। इस समूह ने कोचर पर रिश्वत के बदले वीडियोकॉन समूह को हजारों करोड़ रुपये का ऋण देने का आरोप लगाया। इसके साथ ही कोचर के पतन की दास्तान शुरू हो गई।
जांच एजेसियों ने उनके और पति दीपक कोचर के खिलाफ सबूत जुटाने आरंभ कर कर दिए। जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ होता गया कि कोचर ने आईसीआईसीआई बैंक को हजारों करोड़ के नुकसान की कीमत पर अपने पति की कंपनी को लाभ पहुंचाने में मदद दी। ये खुलासा होने के बाद कोचर ने सीईओ के पद से इस्तीफा दे दिया।
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