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India China Conflict: चीन के नए विदेश मंत्री का भारत पर क्या रुख? नियुक्ति से पहले रिश्तों पर दिया था अहम बयान

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India China Conflict: चीन के नए विदेश मंत्री का भारत पर क्या रुख? नियुक्ति से पहले रिश्तों पर दिया था अहम बयान

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किन गैंग, चीन के विदेश मंत्री

किन गैंग, चीन के विदेश मंत्री
– फोटो : Agency (File Photo)

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चीन ने किन गैंग को नया विदेश मंत्री नियुक्त किया है। वह वांग यी की जगह लेंगे, जिन्होंने इस पद पर एक दशक से ज्यादा समय तक सेवाएं दी हैं। किन गैंग विदेश मंत्री नियुक्त किए जाने से पहले अमेरिका में राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

गैंग की नियुक्ति के बाद से भारत और चीन के रिश्तों को फिर से नए दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। दरअसल, यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है, जब दोनों देशों के बीच रिश्ते एक बार फिर से तल्ख हुए हैं। हाल ही में तवांग में दोनों सेनाओं के बीच तनातनी के कारण भारत-चीन के बीच नए सिर से कूटनीति जारी है।  

नियुक्ति से चार दिन पहले लिखा था लेख
किन ने विदेश मंत्री के रूप में अपनी नियुक्ति से चार दिन पहले अमेरिकी पत्रिका नेशनल इंटरेस्ट के लिए “हाउ चाइना सीज़ द वर्ल्ड” शीर्षक से एक लेख लिखा था। इसमें किन ने भारत के साथ सीमा मुद्दों का उल्लेख किया और कहा कि दोनों देशों के बीच यथास्थिति यह है कि दोनों पक्ष तनाव को कम करने के लिए तैयार हैं और संयुक्त रूप से अपने- अपने देश की सीमाओं की शांति की रक्षा कर रहे हैं।

ताइवान मुद्दे पर अमेरिका व चीन को ठहराया जिम्मेदार
26 दिसंबर को लिखे गए लेख में किन ने भारत-चीन संबंधों को इस धारणा के संदर्भ में संदर्भित किया कि चीन स्थिति कम करने के लिए तैयार है। उन्होंने ताइवान मुद्दे पर भी अपने विचार रखे और यथास्थिति को चुनौती देने के लिए अमेरिका और दक्षिण चीन सागर में यथास्थिति को बदलने के लिए जापान को भी दोषी ठहराया।

चीन के विकास का मतलब शांति के लिए मजबूत ताकत 
अपने लेख में किन ने कहा कि चीन के विकास का मतलब शांति के लिए एक मजबूत शक्ति है न कि यथास्थिति को बदलने के लिए बढ़ती हुई ताकत। उन्होंने कहा, ताइवान मुद्दे पर बढ़ा तनाव चीन द्वारा यथास्थिति को बदलने की कोशिश के कारण नहीं है, बल्कि ताइवान स्वतंत्रता अलगाववादियों और बाहरी ताकतों द्वारा ‘एक चीन’ की यथास्थिति को लगातार चुनौती देने से पैदा हुआ है। 

जिनपिंग के प्रोटोकॉल अधिकारी रह चुके हैं किन 
किन, विदेश मंत्री बनने से पहले अमेरिका में चीन के राजूदत थे। इससे पहले वह 2014 से 2018 तक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। किन के लेख को भारत के बारे में बीजिंग विचारों के रूप में देखा जा रहा है।

विस्तार

चीन ने किन गैंग को नया विदेश मंत्री नियुक्त किया है। वह वांग यी की जगह लेंगे, जिन्होंने इस पद पर एक दशक से ज्यादा समय तक सेवाएं दी हैं। किन गैंग विदेश मंत्री नियुक्त किए जाने से पहले अमेरिका में राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

गैंग की नियुक्ति के बाद से भारत और चीन के रिश्तों को फिर से नए दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। दरअसल, यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है, जब दोनों देशों के बीच रिश्ते एक बार फिर से तल्ख हुए हैं। हाल ही में तवांग में दोनों सेनाओं के बीच तनातनी के कारण भारत-चीन के बीच नए सिर से कूटनीति जारी है।  

नियुक्ति से चार दिन पहले लिखा था लेख

किन ने विदेश मंत्री के रूप में अपनी नियुक्ति से चार दिन पहले अमेरिकी पत्रिका नेशनल इंटरेस्ट के लिए “हाउ चाइना सीज़ द वर्ल्ड” शीर्षक से एक लेख लिखा था। इसमें किन ने भारत के साथ सीमा मुद्दों का उल्लेख किया और कहा कि दोनों देशों के बीच यथास्थिति यह है कि दोनों पक्ष तनाव को कम करने के लिए तैयार हैं और संयुक्त रूप से अपने- अपने देश की सीमाओं की शांति की रक्षा कर रहे हैं।

ताइवान मुद्दे पर अमेरिका व चीन को ठहराया जिम्मेदार

26 दिसंबर को लिखे गए लेख में किन ने भारत-चीन संबंधों को इस धारणा के संदर्भ में संदर्भित किया कि चीन स्थिति कम करने के लिए तैयार है। उन्होंने ताइवान मुद्दे पर भी अपने विचार रखे और यथास्थिति को चुनौती देने के लिए अमेरिका और दक्षिण चीन सागर में यथास्थिति को बदलने के लिए जापान को भी दोषी ठहराया।

चीन के विकास का मतलब शांति के लिए मजबूत ताकत 

अपने लेख में किन ने कहा कि चीन के विकास का मतलब शांति के लिए एक मजबूत शक्ति है न कि यथास्थिति को बदलने के लिए बढ़ती हुई ताकत। उन्होंने कहा, ताइवान मुद्दे पर बढ़ा तनाव चीन द्वारा यथास्थिति को बदलने की कोशिश के कारण नहीं है, बल्कि ताइवान स्वतंत्रता अलगाववादियों और बाहरी ताकतों द्वारा ‘एक चीन’ की यथास्थिति को लगातार चुनौती देने से पैदा हुआ है। 

जिनपिंग के प्रोटोकॉल अधिकारी रह चुके हैं किन 

किन, विदेश मंत्री बनने से पहले अमेरिका में चीन के राजूदत थे। इससे पहले वह 2014 से 2018 तक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। किन के लेख को भारत के बारे में बीजिंग विचारों के रूप में देखा जा रहा है।



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