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विश्व भारती विश्वविद्यालय
– फोटो : ANI
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प्रतिष्ठित विश्व भारती विश्वविद्यालय के छात्रों के एक वर्ग ने सोमवार को दावा किया कि अनुशासन के आधार पर सात छात्रों को दिए गए निलंबन आदेशों को रद्द करने की मांग को लेकर उन्होंने जबरन संस्थान बंद करा दिया। छात्रों ने वरिष्ठ संकाय सदस्य और अर्थशास्त्र के प्रोफेसर सुदीप्त भट्टाचार्य को बर्खास्त करने के फैसले को भी रद्द करने की मांग की।
विश्व भारती के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस तरह के विरोध प्रदर्शनों में केवल कुछ छात्र शामिल हुए और केंद्रीय विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में सुचारु रूप से कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। विश्व भारती एसएफआई के नेता सोमनाथ सो ने प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से कहा कि सोमवार के आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय को बंद कर दिया गया है और वे सहपाठियों के निलंबन के अलोकतांत्रिक अधिनियम और प्रोफेसर भट्टाचार्य को बर्खास्त किए जाने तक विरोध जारी रखेंगे। सोमनाथ निलंबित सात छात्रों में शामिल हैं।
दिसंबर के अंत में छात्रों और भट्टाचार्य के खिलाफ कार्रवाई से पहले कैंपस के अंदर घेराव, धरना और रैलियां हुईं, जहां कुलपति और उनके सुरक्षा गार्डों के साथ कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों ने दो बार मारपीट की, जिससे केंद्रीय विश्वविद्यालय को वार्षिक दीक्षांत समारोह रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सोमनाथ सो के दावे को खारिज करते हुए विश्व भारती की प्रवक्ता महुआ बनर्जी ने कि बहुत कम छात्र बिखरे हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे संस्थान के शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज में कोई बाधा नहीं आई है। आगे उन्होंने कहा कि मैंने व्यक्तिगत रूप से परिसर का दौरा किया है, कक्षाएं निर्धारित समय के अनुसार आयोजित की जा रही हैं। यदि एक या दो कक्षाएं नहीं हो पाती हैं, तो यह एक सामान्य घटना है।
विश्व भारती की प्रवक्ता महुआ बनर्जी ने कहा कि मैंने व्यक्तिगत रूप से परिसर का दौरा किया है, कक्षाएं निर्धारित समय के अनुसार आयोजित की जा रही हैं। यदि एक या दो कक्षाएं नहीं हो पाती हैं, तो यह एक सामान्य घटना है। इसको लेकर चर्चा चल रही है।
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