Home Breaking News ‘कालीचरण’ से अपनी किस्मत के ‘सौदागर’ कैसे बने सुभाष घई, जानें क्यों कहा जाता है ‘दूसरा शोमैन’

‘कालीचरण’ से अपनी किस्मत के ‘सौदागर’ कैसे बने सुभाष घई, जानें क्यों कहा जाता है ‘दूसरा शोमैन’

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‘कालीचरण’ से अपनी किस्मत के ‘सौदागर’ कैसे बने सुभाष घई, जानें क्यों कहा जाता है ‘दूसरा शोमैन’

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बॉलीवुड में ऐसे बहुत ही कम लोग देखने को मिलते हैं, जो सभी फील्ड्स में अपना हुनर दिखा चुके हों। लेकिन जब ऐसे लोग होते हैं, तो इनकी ख्याति देखने काबिल होती है। बॉलीवुड के पास ऐसा ही एक हीरा है, जिसका नाम सुभाष घई है। सुभाष घई वो नाम है, जिसने इस सिनेमा दुनिया में अपना जादू निर्देशन, निर्माण, स्क्रीनराइटर और अभिनय चारों क्षेत्र में दिखाया है। अपने करियर में एक से बढ़कर एक फिल्में देने वाले सुभाष घई को बॉलीवुड का दूसरा शोमैन भी कहा जाता है और यही शोमैन आज अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं। तो इसी खास मौके पर चलिए आपको बताते हैं आखिर क्यों सुभाष घई को ‘बॉलीवुड का दूसरा शोमैन क्यों कहा जाता है।’

सुभाष घई का जन्म 24 जनवरी 1945 को नागपुर में हुआ था। अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद सुभाष घई ने हरियाणा के रोहतक से कॉमर्स की पढ़ाई की। सुभाष घई ने अपना करियर सिनेमा की दुनिया में बनाने का तय किया था और अपने इस सपने की ओर पहला कदम बढ़ाते हुए निर्देशक ने पुणे में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में एडमिशन लिया था। एफटीआईआई से ग्रेजुएशन करने के बाद सुभाष घई मुंबई आए, लेकिन इंडस्ट्री से ताल्लुक न होने के कारण उन्हें किसी भी स्टूडियो में घुसने की अनुमति नहीं दी गई थी। सुभाष घई को इंडस्ट्री में एंट्री लेने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े थे, लेकिन सुभाष ने हार नहीं मानी और उन्होंने सेल्फ हेल्प की किताबें पढ़नी शुरू कीं। काफी समय बाद सुभाष घई को फिल्मों में छोटे-छोटे रोल मिलने लगे लेकिन उनकी किस्मत में एक्टिंग नहीं निर्देशन लिखा था।

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बतौर एक्टर सुभाष घई को बॉलीवुड में वह मुकाम नहीं मिल रहा था, जिसके वह हकदार थे। ऐसे में जब एक्टिंग में उनकी किस्मत नहीं चमकी तो उसके बाद उन्होंने अपनी राह निर्देशन की ओर मोड़ लीं और बेहतरीन फिल्में बनाकर खुद को बॉलीवुड का दूसरा शो मैन बना लिया। सुभाष घई ने साल 1979 में आई फिल्म ‘कालीचरण’ से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा था। शत्रुघ्न सिन्हा स्टारर और सुभाष घई निर्देशित यह पहली ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी। इस फिल्म के बाद सुभाष घई ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने बॉलीवुड को एक से बढ़कर एक फिल्में और कई बेहतरीन सितारे दिए। इन सितारों पर आज भी पूरी इंडस्ट्री फिदा रहती है। सुभाष घई ने जैकी श्रॉफ, माधुरी दीक्षित, मीनाक्षी शेषाद्री, मनीषा कोइराला, महिमा चौधरी, श्रेयस तलपड़े जैसे हीरे देकर ‘दूसरे शोमैन’ की उपाधि हासिल की थी। और तो और स्टार्स के साथ-साथ कोरियोग्राफर सरोज खान भी सुभाष घई की ही देन थीं।  

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बॉलीवुड के इस जाने-माने निर्देशक के निर्देशन में कालीचरण, हीरो, जंग, कर्मा, राम लखन,सौदागर, खलनायक, परदेस और ताल जैसी कई फिल्में बनी। आलम यह था सुभाष घई ने अपने हिंदी सिनेमा करियर में करीब 16 फिल्में लिखीं और निर्देशित की थीं, जिनमे से 13 फिल्म बॉक्स-ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर हिट साबित हुई थीं। साल 2006 में उन्हें सामाजिक फिल्म इकबाल के लिए राष्ट्रीय सम्मान से भी पुरस्कृत किया गया था। सुभाष घई बॉलीवुड के पहले ऐसे प्रोड्यूसर हैं, जिन्होंने अपनी फिल्म ‘ताल’ के जरिए फिल्म इंश्योरेंस पॉलिसी की शुरुआत की थी। फिल्मों को बैंक से फाइनेंस करवाने का कॉन्सेप्ट शुरू करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। इतना ही नहीं सुभाष घई इस समय एक एक्टिंग स्कूल चला रहे हैं। सुभाष घई का व्हिसलिंग वूड्स नाम का एक्टिंग इंस्टीट्यूट मुंबई में स्थित है। ये स्कूल दुनिया के टॉप 10 फिल्म स्कूलों में से एक माना जाता है।

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