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क्रिकेटरों की जिंदगी बाहर से देखने में काफी सुहानी लगती है. बाहर से देखकर लगता है कि इनकी जिंदगी आराम और सुकून से बीत रही है, लेकिन ऐसा कतई नहीं हैं. क्रिकेटर अपने परफॉर्मेंस, निजी जिंदगी, फैन्स की उम्मीदों और ना जाने कितनी अपेक्षाओं का बोझ अपने कंधों पर लादे रहते हैं. कई क्रिकेटर इन उम्मीदों के साथ अपने खेल को आगे बढ़ाते रहते हैं तो कई ऐसे भी क्रिकेटर हुए हैं, जो यह बोझ नहीं सह पाए और बीच में छोड़कर अलग हो गए. भारत में क्रिकेटरों पर अपेक्षाकृत ज्यादा बोझ होता है. खराब परफॉर्मेंस का असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है. कई भारतीय क्रिकेटरों ने अपने इन अनुभवों को साझा भी किया है. कई भारतीय क्रिकेटरों ने बताया है कि किस तरह खराब परफॉर्मेंस और कहीं से भी सपोर्ट ना मिलने पर उनके मन में कई तरह के बुरे ख्याल भी आए थे.
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