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Amritpal Case: सैन फ्रांसिस्को में भारतीय कॉन्स्युलेट पर हमले की अमेरिका ने की निंदा, कहा- ये अस्वीकार्य

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Amritpal Case: सैन फ्रांसिस्को में भारतीय कॉन्स्युलेट पर हमले की अमेरिका ने की निंदा, कहा- ये अस्वीकार्य

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भारतीय कॉन्स्युलेट पर हुए हमले की अमेरिका ने की निंदा।

भारतीय कॉन्स्युलेट पर हुए हमले की अमेरिका ने की निंदा।
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

लंदन के बाद अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भी खालिस्तानी समर्थकों ने भारतीय वाणिज्यिक दूतावास में घुसकर तोड़फोड़ की। इसको लेकर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। अब इस मामले में व्हाइट हाउस की तरफ से भी बयान आ गया है। मंगलवार को व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने इस घटना की निंदा की और इसे अस्वीकार्य बताया। 

व्हाइट हाउस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा है कि सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास में तोड़फोड़ ‘बिल्कुल अस्वीकार्य’ है और अमेरिका द्वारा इसकी निंदा की जाती है। किर्बी ने कहा, ‘हम निश्चित रूप से उस बर्बरता की निंदा करते हैं, यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। विदेश विभाग की राजनयिक सुरक्षा सेवा उचित जांच के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ काम कर रही है। राज्य विभाग नुकसान की मरम्मत के लिए बुनियादी ढांचे के परिप्रेक्ष्य में काम करेगा।’ 

अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘संयुक्त राज्य अमेरिका भारतीय वाणिज्य दूतावास के खिलाफ हमले और संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर राजनयिक सुविधाओं के खिलाफ किसी भी हमले की निंदा करता है। हम इन सुविधाओं के साथ-साथ काम करने वाले राजनयिकों की सुरक्षा की रक्षा करने की प्रतिज्ञा करते हैं।’ 

भारत ने जताई थी आपत्ति 

सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमले को लेकर ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस)’ ने कहा, ‘हम लंदन के साथ-साथ सैन फ्रांसिस्को में भी कानून-व्यवस्था की विफलता से चकित हैं, जहां कुछ कट्टरपंथी अलगाववादियों ने भारत के राजनयिक मिशन पर हमला किया।’ 

वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि नई दिल्ली में अमेरिकी प्रभारी डी’अफेयर के साथ एक बैठक में, भारत ने भारत के महावाणिज्य दूतावास और सैन फ्रांसिस्को की संपत्ति के विध्वंस पर अपना कड़ा विरोध व्यक्त किया। इस बैठक में अमेरिकी सरकार को राजनयिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा और सुरक्षित करने के अपने मूल दायित्व की याद दिलाई गई। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उचित उपाय करने को कहा गया। इसके अलावा, वाशिंगटन डीसी में दूतावास ने भी इसी तरह की तर्ज पर अमेरिकी विदेश विभाग को अपनी चिंताओं से अवगत कराया।  

क्या हुआ था? 

जानकारी के मुताबिक, खालिस्तान समर्थकों ने नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने अस्थाई सुरक्षा व्यवस्था को धवस्त करते हुए सैन फ्रांसिस्को स्थित वाणिज्य दूतावास परिसर के अंदर दो तथाकथित खालिस्तानी झंडे लगाए। हालांकि वाणिज्य दूतावास के दो कर्मचारियों ने जल्द ही इन झंडों को हटा दिया। इस दौरान गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने वाणिज्य दूतावास परिसर में प्रवेश किया और अपने हाथों में लगी छड़ों से दरवाजे और खिड़कियों पर हमला बोल दिया। 

भारतीय-अमेरिकियों ने इसकी कड़ी निंदा की है। साथ ही इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग भी की है। भारतीय अमेरिकी समुदाय के नेता अजय भूटोरिया ने सैन फ्रांसिस्को में भारत के वाणिज्य दूतावास भवन पर खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि हिंसा का यह कृत्य न केवल अमेरिका और भारत के बीच राजनयिक संबंधों के लिए खतरा है, बल्कि हमारे समुदाय की शांति और सद्भाव पर भी हमला है। भूटोरिया ने स्थानीय अधिकारियों से इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने और उन्हें न्याय दिलाने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने कहा कि मैं अपने समुदाय के सभी सदस्यों से एकजुट का भी आग्रह किया।

सिख कट्टरपंथ को भड़काने के पीछे पाकिस्तान का हाथ

FIIDS ने मांग करते हुए कहा कि हम डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS), FBI और CIA जैसे कानून और व्यवस्था संस्थानों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह करेंगे कि संयुक्त राज्य अमेरिका में आतंकवाद को कोई जगह और समर्थन न मिले। साथ ही उसने यह भी कहा कि झूठे प्रचार के साथ सिख कट्टरपंथ को भड़काने और फंडिंग करने के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई है। 

 

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