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'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- नेत्र, जिसका अर्थ है- आँख, नयन। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- इसीलिए खड़ा रहा कि तुम मुझे पुकार लो !
इसीलिए खड़ा रहा
कि तुम मुझे पुकार लो!
एक
ज़मीन है न बोलती
न आसमान बोलता,
जहान देखकर मुझे
नहीं ज़बान खोलता,
नहीं जगह कहीं जहाँ
न अजनबी गिना गया,
कहाँ-कहाँ न फिर चुका
दिमाग़-दिल टटोलता,
कहाँ मनुष्य है कि जो
उमीद छोड़कर जिया,
इसीलिए अड़ा रहा
कि तुम मुझे पुकार लो!
इसीलिए खड़ा रहा
कि तुम मुझे पुकार लो!
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6 hours ago
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