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अमर उजाला की खास पेशकश ‘खबरों के खिलाड़ी’ की नौंवी कड़ी में एक बार फिर हम आपके सामने प्रस्तुत हैं। इस शो को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बेहद पसंद किया जा रहा है, उसके लिए सभी पाठकों का बहुत आभार। इस साप्ताहिक कार्यक्रम में हम हफ्ते की बड़ी खबरों और राजनीतिक घटनाक्रम का सधा हुआ विश्लेषण करते हैं। यह दिलचस्प चुनावी चर्चा अमर उजाला के यूट्यूब चैनल पर लॉन्च हो चुकी है। इसे रविवार सुबह नौ बजे भी देखा जा सकता है।
इस हफ्ते अतीक अहमद-अशरफ की हत्या, कर्नाटक चुनाव, नरोदा केस के सभी आरोपियों का बरी होना, विपक्षी एकता समेत तमाम मुद्दे काफी हावी रहे। कहा जा रहा है कि यूपी की घटनाओं का असर कर्नाटक चुनाव में भी देखने को मिलेगा। अतीक-अशरफ की हत्या का मुद्दा चुनाव में गर्म होगा। ऐसे ही अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए इस बार हमारे साथ पूर्णिमा त्रिपाठी, सुमित अवस्थी, देश रतन, शिवम त्यागी, प्रेम कुमार जैसे वरिष्ठ विश्लेषक मौजूद थे। यहां पढ़िए चर्चा के कुछ अहम अंश….
सुमित अवस्थी
‘तीन सिरफिरों ने यूपी के प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को खुलेआम गोली मार दी। दूसरी तरफ भाजपा सरकार कहती है कि योगी आदित्यनाथ के आने के बाद से सूबे में कानून राज कायम है। ये कैसा कानून राज है, जहां पुलिस की मौजूदगी में दो लोगों की हत्या हो जाती है? क्या इसका असर कर्नाटक चुनाव में भी देखने को मिलेगा? क्या उमेश पाल और फिर अतीक-अशरफ की हत्या ये बताती है कि यूपी में कानून व्यवस्था खत्म हो गई है? भाजपा के लोग बोल रहे हैं कि इतने लंबे समय तक अतीक-अशरफ को कोर्ट से भी सजा नहीं मिल पाई, क्योंकि तब की सरकारें नहीं चाहती थीं। अब तो भाजपा की सरकार है। फिर तो कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था के जरिए इन अपराधियों को सजा दिलाना चाहिए?’
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