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Amritpal Singh News:
– फोटो : अमर उजाला
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पंजाब के मोगा जिले का गांव रोडे यूं तो सामान्य सा गांव है, लेकिन इसकी पहचान दमदमी टकसाल के 14वें जत्थेदार और खालिस्तान समर्थक जरनैल सिंह भिंडरांवाले से है। फरवरी 2018 में इस गांव में भिंडरांवाले की याद में एक गुरुद्वारा स्थापित किया गया, जिसे नाम दिया गया- गुरुद्वारा संत खालसा।
गुरुद्वारा संत खालसा आज फिर चर्चा में है। खुद को जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तरह स्थापित करने की कोशिश करने वाले अमृतपाल सिंह को इसी गुरुद्वारा साहिब से पकड़ा गया है। 29 सितंबर 2022 को इस गुरुद्वारा परिसर में हजारों की भीड़ जमा थी, जहां पर ‘वारिस पंजाब दे’ के नए प्रमुख अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी की गई थी।
दमदमी टकसाल सहित पंजाब के कई गुरुद्वारों से लोग शामिल हुए थे। जरनैल सिंह भिंडरांवाले के भतीजे एवं श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार जसबीर सिंह रोडे ने कहा था कि यह बात साफ करना जरूरी है। यह दस्तारबंदी ‘वारिस पंजाब दे’ के नए जत्थेदार अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी है।
रोडे को यह स्पष्टीकरण देने की जरूरत इसलिए पड़ी थी क्योंकि पूरे कार्यक्रम को कुछ इस तरह से तैयार किया गया था कि अमृतपाल सिंह को नए भिंडरांवाले के तौर पर पेश किया जा सके। ‘वारिस पंजाब दे’ का रोडे गांव से कोई सीधा संबंध नहीं था, फिर भी रोडे गांव में दस्तारबंदी कर सांकेतिक संदेश दिया गया था कि पंजाब में खालिस्तान की लहर दोबारा शुरू हो रही है।
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