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जम्मू-कश्मीर: आतंकी सलाहुद्दीन के दो बेटों की संपत्तियां कुर्क, पुलवामा हमले में आरोपी की छह दुकानें जब्त

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जम्मू-कश्मीर: आतंकी सलाहुद्दीन के दो बेटों की संपत्तियां कुर्क, पुलवामा हमले में आरोपी की छह दुकानें जब्त

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Jammu Kashmir: Properties of two sons of terrorist Salahuddin attached, six shops of accused in Pulwama attack

Srinagar
– फोटो : ANI

विस्तार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम) के स्वयंभू सुप्रीम कमांडर और यूनाइटेड जिहाद काउंसिल (यूजेसी) के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन के बेटों की दो संपत्तियों को कुर्क कर लिया। इसमें मकान तथा कृषि भूमि शामिल है।

प्रवक्ता के अनुसार एनआईए पाकिस्तान और अन्य देशों में स्थित व्यक्तियों की मदद से जम्मू और कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी संगठनों को वित्तपोषण करने वाले पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म करने के लिए नकेल कस रही है। एनआईए प्रवक्ता के अनुसार, टीम ने सबसे पहले श्रीनगर के रामबाग इलाके के नरसिंह गढ़ में सलाहुद्दीन के बेटे सैयद अहमद शकील के नाम पर पंजीकृत घर को कुर्क किया।

इसके बाद टीम ने बडगाम जिले के सोईबुग में दो कनाल (10880 वर्ग फुट) कृषि भूमि को भी कुर्क किया, जो सलाहुद्दीन के एक अन्य बेटे शाहिद युसूफ के नाम पर है। दोनों ही संपत्तियों पर एनआईए ने संपत्तियों को कुर्क करने का नोटिस चस्पा किया गया।

प्रवक्ता के अनुसार मध्य कश्मीर के बडगाम जिले की सोइबुग तहसील और श्रीनगर के नर्सिंग गढ़ मोहल्ला राम बाग स्थित शाहिद यूसुफ और सैयद अहमद शकील की अचल संपत्ति को अनैतिक गतिविधि निवारण अधिनियम (यूएपीए) की धारा 33(1) के तहत कुर्क किया गया है।

शाहिद यूसुफ और सैयद अहमद शकील अक्टूबर 2017 और अगस्त 2018 में गिरफ्तारी के बाद से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ क्रमशः 20 अप्रैल 2018 और 20 नवंबर 2018 को चार्जशीट किया गया था। दोनों को पिता के सहयोगियों और हिजबुल के ओवरग्राउंड वर्कर्स से विदेशों से धन प्राप्त होता रहा है।

प्रवक्ता ने बताया कि सैयद सलाहुद्दीन जो 1993 में पाकिस्तान भाग गया था, उसे अक्टूबर 2020 में भारत द्वारा एक आतंकवादी के रूप में नामित किया गया था। उसने पाकिस्तान से काम करना जारी रखा है, जहां से वह हिजबुल कैडरों के साथ-साथ यूजेसी (यूनाइटेड जिहाद काउंसिल) के कार्यकर्ताओं को निर्देश दे रहा है।

यूजेसी को मुत्तहिदा जिहाद काउंसिल (एमजेसी) के नाम से भी जाना जाता है, जो लगभग 13 पाकिस्तान स्थित कश्मीर केंद्रित आतंकी संगठनों का समूह है। उन्होंने यह भी बताया कि यह संगठन भारत में मुख्य रूप से कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों को उकसाने और संचालित करने के अलावा सैयद सलाहुद्दीन हिजबुल कैडरों की आतंकवादी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए हवाला चैनलों और अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण चैनलों के माध्यम से भारत में धन जुटा रहा है और वित्त पोषण कर रहा है। 

प्रवक्ता के अनुसार, एनआईए ने नवंबर 2011 में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन जुटाने, एकत्र करने, प्रदान करने और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के उद्देश्य से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी समूहों और उनके हमदर्दों के बीच धन वितरित करने की आपराधिक साजिश की जांच शुरू की।

दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने शुरू में जनवरी 2011 में एक मामला दर्ज किया था। बाद में इस मामले को एनआईए ने अपने हाथ में ले लिया था। 2011 और 2018 सहित मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र दायर किए गए थे।

एनआईए ने सोमवार को ही पुलवामा के लेथपोरा में सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर 2018 के हमले से संबंधित एक मामले में अवंतिपोरा में छह दुकानों को भी जब्त कर लिया। सितंबर 2020 में इसी मामले में एक आरोपी के पिता के घर सहित कुछ जमीन को भी कुर्क किया गया था।

2021 में एनआईए ने पुलवामा के लेथपोरा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकवादी हमले के मामले में दो आरोपियों के परिजनों से संबंधित आवासीय संपत्तियों को कुर्क किया था। एनआईए ने दो भाइयों (अनिल परिहार और अजीत परिहार) की हत्या के मामले में एक अन्य आवासीय संपत्ति भी कुर्क की है।

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