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सुप्रीम कोर्ट
– फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने LGBTQIA+ समुदाय के लिए विवाह समानता अधिकारों से संबंधित विभिन्न याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा है। इसके अलावा बिहार सरकार ने राज्य में जाति आधारित जनगणना पर अंतरिम रोक लगाने के पटना उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया।
समलैंगिक विवाह को लेकर अभी क्या हो रहा है?
पिछले कुछ समय में देशभर की कई अदालतों में याचिकाएं दायर करके समलैंगिक विवाह को वैधानिक मान्यता देने की मांग की जा रही है। 18 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने ऐसी 20 याचिकाओं को क्लब करके सुनवाई शुरू की। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ में भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति रवींद्र भट, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा शामिल हैं। शीर्ष अदालत के समक्ष याचिकाओं में विशेष विवाह अधिनियम, विदेशी विवाह अधिनियम और हिंदू विवाह अधिनियम सहित विभिन्न अधिनियमों के तहत समान-लिंग विवाह को मान्यता देने की मांग की गई है।
समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के विरोध में कौन?
समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिलेगी या नहीं यह तो कोर्ट में तय होगा लेकिन इससे पहले कई स्तर पर इसका विरोध हो रहा है। केंद्र सरकार से लेकर, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध किया है।
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