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डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया।
– फोटो : सोशल मीडिया
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के चार दिन बाद भी कांग्रेस मुख्यमंत्री तय नहीं कर सकी है। पार्टी के दो दिग्गजों सिद्धरमैया व डीके शिवकुमार के बीच शह और मात के खेल ने आलाकमान के सामने असमंजस खड़ा कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर नेताओं की दिनभर चली बैठकें बेनतीजा रहीं, अब बुधवार को फिर से बैठक बुलाई गई है।
सोमवार को पेट में तकलीफ बताकर दिल्ली नहीं आने वाले शिवकुमार मंगलवार सुबह राजधानी पहुंचे। खरगे से करीब आधे घंटे की मुलाकात में उन्होंने बतौर सीएम न सिर्फ सिद्धरमैया का नाम खारिज कर दिया, बल्कि उपमुख्यमंत्री बनने या सीएम पद साझा करने के प्रस्ताव भी ठुकरा दिए। सूत्राें के मुताबिक, उन्होंने खुद को सीएम पद का स्वाभाविक हकदार बताया। कहा, अन्यथा सामान्य विधायक रहना पसंद करूंगा।
खरगे से मिलने के बाद शिवकुमार ने मीडिया से कोई बात नहीं की, लेकिन दिल्ली रवाना होने से पहले बंगलूरू में कहा, पार्टी मेरे लिए मां है और मां अपने बेटे को सबकुछ देती है। पार्टी चाहे तो मुझे जिम्मेदारी दे सकती है। हम संयुक्त परिवार हैं, मैं किसी को बांटना नहीं चाहता। मैं जिम्मेदार व्यक्ति हूं। पार्टी का जो भी फैसला हो, न तो पीठ में छुरा घोपूंगा, न ब्लैकमेल करूंगा और न ही पार्टी छोड़ूंगा।
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