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फिक्की इंडस्ट्री एकेडमिया कॉन्फ्रेंस
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मंडी हाउस पर दूसरा फिक्की इंडस्ट्री एकेडमिया कॉन्फ्रेंस 2023 का आयोजन किया गया। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के कई शिक्षण संस्थानों से जुड़े विद्वान, उद्योग विशेषज्ञ और छात्र शामिल हुए। इस बीच अलग-अलग सत्रों में अत्याधुनिक शिक्षा प्रणाली के विकास, शोध व नवाचार, इससे जुड़े उद्योगों पर चर्चा की गई। अमर उजाला ने इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मीडिया पार्टनर की भूमिका निभाई।
फिक्की के महानिदेशक अरुण चावला की अध्यक्षता में शुक्रवार को सुबह इसके उद्धाटन सत्र का आयोजन किया गया। इसके बाद तीन सत्रों में अलग-अलग विषयों पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। पहले सत्र में अनुसंधान और नवाचार के लिए उद्योग-अकादमिक साझेदारी पर पैनल चर्चा हुई।
इसमें पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी (पीडीईयू) के महानिदेशक डॉ एस सुंदर मनोहरन, मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट गाजियाबाद के निदेशक डॉ विशाल तलवार, बिट्स बायो साइटिक फाउंडेशन के संस्थापक डॉ सत्य प्रकाश दाश, आईआईटी दिल्ली कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अभय कपूर और केन-42 के सह संस्थापक व मुख्य रणनीति अधिकारी बाला एमएस ने हिस्सा लिया। इस दौरान देश के आर्थिक विकास, मेक इन इंडिया, युवा शिक्षित वर्ग के लिए उपलब्ध शैक्षिक अनुसंधान व नवाचार पर चर्चा हुई।
इंटर्नशिप और स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल वातावरण पर भी विचार हुआ। प्रो. अभय कपूर ने कहा कि देश की कई यूनिवर्सिटी बिजनेस इन्क्यूबेटर्स (यूबीआईएस) व इनोवेशन सेंटर विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। दूसरी पैनल चर्चा उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन- ऑनलाइन शिक्षण और शिक्षण के लिए उद्योग-अकादमिक भागीदारी विषय पर आधारित थी।
इसमें सिमबायोसिस इंटरनेशनल के कुलपति डॉ रजनी आर गुप्ते, इंडिया एंड एपेक की प्रबंध निदेेशक राघव गुप्ता, टीसीएस की शिक्षा विभाग की भारत में प्रमुख कामाख्या विक्रम, टाइम्स प्रो के अधिकारी परीक्षित मार्कन्डेय व ई-वाई पार्थेनॉन से जुड़ी अवंतिका तोमर ने हिस्सा लिया। इस सत्र के दौरान छात्रों और शिक्षण संस्थानों की बदलती जरूरतों और अपेक्षाओं पर नए दृष्टिकोण और समाधान प्रस्तुत किए गए। डॉ रजनी आर गुप्ते ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी ने उच्च शिक्षा को पूरी तरह बदल दिया है।
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