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'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- अक्षर, जिसका अर्थ है- अच्युत, स्थिर, वर्णमाला का कोई स्वर या व्यंजन वर्ण। प्रस्तुत है उमाकंत मालवीय की कविता- नाकाफ़ी लगती है हर ज़बान
नाकाफ़ी लगती है हर ज़बान
कोई अक्षर
कोई शब्द किसी भाषा का
पूरा-पूरा कैसे व्यक्त करे
क्या कुछ कहता मन का बियाबान?
एक रहा आने की, जाने की
घिसे-पिटे पंगु कुछ मुहावरे
दीमक की चाटी कुछ शक्लें हैं
बदहवास कुछ, कुछ-कुछ बावरे।
कोई कितना ज़हर पिए कहो
नीला पड़ गया टँगा आसमान।
बाबा आदम से गुम हुए सभी
तोड़ते ज़मीन कुछ तलाशते।
रूढ़ हो गईं सारी मुद्राएँ
अर्थ जरा-जर्जर-से खाँसते।
कितना यांत्रिक! आदत-सा लगता
डूब रहा सूरज या हो विहान।
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11 hours ago
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