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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।
– फोटो : amar ujala
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पटना में होने वाला सम्मेलन लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्षी एकता का अहम पड़ाव हो सकता है, पर इसके जरिये नेतृत्व का मुद्दा सुलझाना आसान न होगा। जिस तरह से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव विपक्षी दलों से साथ मांग रहे हैं, उसका एक पहलू यह भी है कि क्या वह देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में बिग बॉस की भूमिका में कुबूल किए जाएंगे।
समाजवादी धारा के अपने तर्क हैं तो कांग्रेसी भी राज्य और केंद्र के चुनाव में फर्क समझने की बात कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के नेता नीतीश कुमार विपक्षी एकता के सूत्रधार बने हुए हैं। पटना में 23 जून को होने वाली रैली में राजद, झामुमो, सपा, तृणमूल कांग्रेस, भारत राष्ट्र समिति, डीएमके और एनसीपी सरीखी क्षेत्रीय शक्तियों के साथ ही कांग्रेस का शामिल होना लगभग तय है।
सपा और एनसीपी के सिवाय ये क्षेत्रीय शक्तियां अपने प्रभाव वाले राज्यों में सरकार चला रही हैं। जबकि कांग्रेस ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक का चुनाव जीतकर मजबूती के साथ अपने पुनरोत्थान का संदेश दिया है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि जो क्षेत्रीय शक्ति जिस राज्य में मजबूत है, भाजपा को हराने की रणनीति पर काम करने वाले शेष दलों को उसका साथ देना चाहिए। इसके लिए वे शेष दलों को बड़ा दिल दिखाने की बात भी कह रहे हैं।
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