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'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- ठगिनी, जिसका अर्थ है- धोखा देकर लूटने वाली स्त्री, ठग की स्त्री, कुटनी। प्रस्तुत है दिनेश कुमार शुक्ल की कविता- ललमुनियाँ की दुनिया
उलझी-पुलझी झाड़ी लाखों साल पुरानी
उस पर बैठी ललमुनियाँ थी बड़ी सयानी
इस टहनी से उस टहनी पर फुदक रही थी
टहनी में काँटे, काँटों में टीस भरी थी
लगती थी सूखी झाड़ी पर हरी-भरी थी
फूल खिले थे फूलों में, मुरझाया था मन
तौला मैंने फिर-फिर तौला अपने मन को
लिखा-मिटाया, लिखा-मिटाया फिर जीवन को
ख़ुद को ठोक बजाया, पत्थर पे दे मारा
हारी बाज़ी जीती, जीती बाज़ी हारा
साधा फिर-फिर माया ठगिनी के ठनगन को
अनदेखे ही आँखें दे दीं इनको उनको
फिर भी ख़ालिस बचा ले गया मैं बचपन को
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4 hours ago
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