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आज का शब्द: झंकृत और हरिवंशराय बच्चन की कविता- फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ

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आज का शब्द: झंकृत और हरिवंशराय बच्चन की कविता- फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ

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                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- झंकृत, जिसका अर्थ है- जिसमें झनकार हुई हो। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ 
                                                                                                
                                                     
                            

मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ,
फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ;
कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकर
मैं सासों के दो तार लिए फिरता हूँ!

मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ,
मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ,
जग पूछ रहा है उनको, जो जग की गाते,
मैं अपने मन का गान किया करता हूँ!

मैं निज उर के उद्गार लिए फिरता हूँ,
मैं निज उर के उपहार लिए फिरता हूँ;
है यह अपूर्ण संसार ने मुझको भाता
मैं स्वप्नों का संसार लिए फिरता हूँ!

मैं जला हृदय में अग्नि, दहा करता हूँ,
सुख-दुख दोनों में मग्न रहा करता हूँ;
जग भव-सागर तरने को नाव बनाए,
मैं भव मौजों पर मस्त बहा करता हूँ!

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9 घंटे पहले

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