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ट्रेड विशेषज्ञ अतुल मोहन के मुताबिक वरुण धवन की मार्केट वैल्यू नहीं है इसलिए सिनेमाघरों में रिलीज होने पर ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बवाल नहीं मचा पाती। अतुल मोहन कहते हैं, ‘वरुण धवन की वैसे भी मार्केट वैल्यू नहीं है, ऊपर से फिल्म ‘बवाल’ थोड़ी कलात्मक फिल्म है, जब सिनेमाघरों में कमर्शियल फिल्मों नहीं चल रही है तो ‘बवाल’ कहां से चलती। ऐसी फिल्मों की बॉक्स ओपनिंग अच्छी नहीं हो सकती है। फिल्म के निर्माता का ओटीटी पर रिलीज करने का फैसला सही है, वहां दर्शकों को फिल्म अच्छी लगती है तो देखते हैं, नहीं तो नहीं देखते हैं। इसमें दर्शकों का कोई खास नुकसान नहीं होता है।’
2017 में रिलीज हुई फिल्म ‘जुड़वा 2’ के बाद से अरुण धवन की कोई भी सोलो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ‘बवाल’ नहीं मचा पाई है। इस दौरान उनकी ‘अक्टूबर’, ‘कलंक’, ‘स्ट्रीट डांसर थ्रीडी’ फ्लॉप रहीं। ‘सुई धागा’ और ‘जुग जुग जियो’ ने औसत कारोबार किया और ‘’ ‘’ ‘कुली नंबर 1’ सीधे ओटीटी पर रिलीज हुई। अब ले देकर वरुण धवन के पास सिर्फ एक फिल्म है जिसे तमिल सिनेमा के निर्देशक कलीस के साथ ‘जवान’ के निर्देशक एटली और उनकी पत्नी प्रिया बना रहे हैं। ये फिल्म साउथ सिनेमा की हिट फिल्म ‘थेरी’ की रीमेक बताई जा रही है। फिल्म ‘बवाल’ के सिनेमाघरों तक न पहुंच पाने से वरुण धवन की रही सही मार्केट वैल्यू भी और नीचे आ गई है।
इस बारे में ‘अमर उजाला’ ने जब फिल्म कारोबार विशेषज्ञ कोमल नाहटा का से बात की तो उनका कहना था कि सिनेमाघरों में इन दिनों फिल्में रिलीज करना किसी खतरे से कम नहीं है। कोमल नाहटा कहते हैं, ‘इन दिनों सिनेमाघरों में किसी भी फिल्म को अच्छी ओपनिंग नहीं मिल रही है, इसलिए फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज करना किसी खतरे से खाली नहीं है । ‘मिशन इंपॉसिबल 7’ और ‘ओपनहाइमर’ जैसी हॉलीवुड की फिल्मों को तो अच्छी ओपनिंग मिल जाती हैं, लेकिन हिन्दी फिल्मों को अच्छी ओपनिंग नहीं मिल रही है। ऐसे समय में अगर ‘बवाल’ ओटीटी पर रिलीज न होकर पहले सिनेमाघरों में रिलीज होती तो मेरे हिसाब से फिल्म को आठ से 10 करोड़ के करीब ओपनिंग मिल सकती थी।’
पिछले साल इन्हीं दिनों फिल्म ‘बवाल’ की शूटिंग चल रही थी। तब ये बताया जा रहा था कि ये फिल्म वरुण धवन के करियर की सबसे महंगी फिल्म होगी। पेरिस, बर्लिन, पोलैंड, एम्सटर्डम, क्राकोव और वारसा में तब फिल्म की शूटिंग हो रही थी और करीब 700 लोगों की टीम पर हर दिन औसतन ढाई करोड़ रुपये का खर्च आ रहा था। इन शहरों में फिल्म की शूटिंग करीब 10 दिन चली, मतलब सिर्फ इस एक शेड्यूल पर ही साजिद नाडियाडवाला ने 25 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। फिल्म की भारत में हुई शूटिंग और सितारों की फीस मिलाकर इसका बजट करीब 80 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। ऐसे में कोमल नाहटा की बात को मानें तो फिल्म की ओपनिंग 10 फीसदी के करीब रहती और ये फिल्म को हिट कराने के लिए नाकाफी साबित हो सकती थी।
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