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अपनी कालजयी फिल्मों के लिए चार बार सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशन का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त कर चुके नितिन चंद्रकांत देसाई का असमय निधन हिंदी सिनेमा की दशा और दुर्दशा दोनों की तरफ एक बहुत दुखद संकेत है। दिखावे की जिंदगी में मस्त रहने वाले हिंदी सिनेमा के तमाम फिल्मकारों और उनकी कंपनियों का ये कड़वा सच है और ये भी सच है कि बेइंतहा कर्ज में डूबने के चलते ही नितिन देसाई कई हफ्तों से मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे। अपनी जान लेने का उनका फैसला भी इसी की परिणीति माना जा रहा है।
गोविंद निहलानी के धारावाहिक ‘तमस’ में जुड़कर ऐतिहासिक कहानियों को फिल्माने की बारीकियां सीखने वाले नितिन देसाई ने धारावाहिक ‘चाणक्य’ में कला निर्देशन का काम बीच से पकड़ा था। हिंदी सिनेमा के दर्शकों को उनका काम पहले पहल विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘1942 ए लव स्टोरी’ में भाया। इसके बाद ‘लगान’, ‘स्वदेस’ और ‘देवदास’ जैसी फिल्मों ने उनकी समय के हिसाब से सेट्स बनाने की कला का नाम देश दुनिया में मशहूर कर दिया। हॉलीवुड फिल्म ‘स्लमडॉग मिलिनेयर’ की मुंबई में हुई शूटिंग के लिए केबीसी के सेट भी उन्होंने ही बनाए थे।
नितिन चंद्रकांत देसाई ने महाराष्ट्र सरकार से जमीन लेकर मुंबई से काफी दूर करजत में 50 एकड़ से अधिक भूमि पर एक विशालकाय स्टूडियो की स्थापना की। यहीं पर फिल्म ‘जोधा अकबर’ की शूटिंग हुई। फिल्म का सेट उन्होंने हटाया नहीं और इसी में फेरबदल करके बाद में कई टेलीविजन धारावाहिकों की शूटिंग यहां चलती रही। बताते हैं कि नितिन के ऊपर इन दिनों करीब 252 करोड़ का कर्ज था और इसकी वसूली के लिए स्थानीय प्रशासन से मिलकर वित्तीय कंपनियों ने कार्रवाई शुरू कर दी थी। नितिन को अंदेशा था कि उन्हें एक दिन इस स्टूडियो से बेदखल होना ही पड़ेगा और इसी तनाव के चलते बताते हैं उन्होंने खुदकुशी कर ली।
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