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प्रियंका अग्रवाल ने साउथ से सीखे ये सबक, कामयाबी के अनमोल पांच मंत्र

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प्रियंका अग्रवाल ने साउथ से सीखे ये सबक, कामयाबी के अनमोल पांच मंत्र

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देश के सबसे बड़े फिल्म पुरस्कार कहलाने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हालांकि थोड़ा विलंब से चल रहे हैं और अब जाकर साल 2021 में सेंसर सर्टिफिकेट पाने वाली भारतीय फिल्मों को दिए गए पुरस्कारों की घोषणा हो सकी है। लेकिन, इन पुरस्कारों में कुछ विजेताओं के नाम ऐसे हैं जिन्हें अभिनेत्री प्रियंका अग्रवाल अपने अभिनय जीवन के सबक मानती रही हैं। वह कहती हैं, ये बात तो अब हिंदी सिनेमा के लोग भी मानते हैं कि साउथ सिनेमा की तकनीकी दक्षता का कोई तोड़ नहीं है। हाल ही में घोषित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में कम से कम पांच नाम ऐसे हैं जिनसे बिंदास बाला प्रियंका अग्रवाल ने कामयाबी के पांच अनमोल मंत्र सीखे हैं। ‘अमर उजाला’ के साथ खास बातचीत में उन्होंने इनका खुलासा किया…



हम होंगे कामयाब एक दिन

आर माधवन (सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म रॉकेट्री)

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में वैसे तो दर्जनों पुरस्कार शामिल हैं लेकिन फीचर फिल्म कैटेगरी में जो सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार होता है, वह है गोल्डन लोटस यानी स्वर्ण कमल पुरस्कार। ये पुरस्कार साल की किसी बेहतरीन भारतीय फिल्म को दिया जाता है। साल 2021 के लिए ये पुरस्कार फिल्म ‘रॉकेट्री’ को मिला है जिसके निर्माता और निर्देशक आर माधवन हैं। माधवन ने ही फिल्म में इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन का किरदार निभाया है। प्रियंका अग्रवाल कहती हैं, ‘आर माधवन की फैन मैं फिल्म ‘रहना है तेरे दिल’ के समय से ही रही हूं। छोटी थी तो सिनेमा इतना समझ नहीं आता था लेकिन फिल्म के गाने आज भी मेरे सबसे फेवरिट गानों में शामिल हैं। मैंने माधवन सर से लगातार संघर्ष करते रहना और हिम्मत न हारने का हौसला बनाए रखना सीखा है।’


घर पर पति, काम पर सुपरस्टार

अल्लू अर्जुन (सर्वश्रेष्ठ अभिनेता- फिल्म पुष्पा)

प्रियंका अग्रवाल तेलुगू अभिनेता अल्लू अर्जुन के साथ फिल्म करने के लिए कोई भी चुनौती पार करने को तैयार हैं। वह कहती हैं, ‘जब मैं उत्तर से जाकर दक्षिण की फिल्मों में अपना नाम बनाने की कोशिशें कर रही थी तकरीबन उसी समय अल्लू अर्जुन की फिल्में हिंदी में डब होकर उत्तर भारत में धमाल मचा रही थीं। अल्लू अर्जुन की शख्सियत ऐसी है कि देखने वाला उन पर पहली नजर में ही फिदा हो जाता है। उनसे मैंने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन को अलग-अलग रखना सीखा है। वह अपने परिवार के प्रति समर्पित व्यक्ति हैं और जब परिवार के साथ होते हैं तो सिनेमा से बिल्कुल अलग व्यक्ति होते हैं।’


परहित सरस धर्म नहिं भाई

किरनराज के (सर्वश्रेष्ठ कन्नड़ फिल्म 777 चार्ली)

एक इंसान और एक कुत्ते की दोस्ती पर बनी फिल्म ‘777 चार्ली’ प्रियंका अग्रवाल की पसंदीदा फिल्मों में शामिल है। वह कहती हैं, ‘फिल्म ‘777 चार्ली’ इंसानियत के एक अलग ही रूप को परदे पर पेश करती है। जब मैंने ये फिल्म सिनेमाहाल में देखी, तब भी कई मौकों पर मेरी आंखें भर आई थीं। ये फिल्म हमें अपने भीतर झांकने का मौका देती है और ये बताती है कि जो कुछ हमें ईश्वर ने दिया है, क्या हम उसका उपयोग किसी दूसरे जीव को सुखी बनाने में कर सकते हैं? खुद को कष्ट में डालकर दूसरों की सेवा करने से बड़ा धर्म कोई दूसरा नहीं है। और, निर्देशक किरनराज के ने जिस तरह से ये फिल्म रची है, उसने मुझे उनका फॉलोअर बना दिया है।’


घर की अहमियत को समझिए

रोजिन थॉमस (सर्वश्रेष्ठ मलयालम फिल्म होम)

रोजिन थॉमस की मलयालम फिल्म ‘होम’ ने अभिनेत्री प्रियंका अग्रवाल को कोविड संक्रमण काल के दौरान बहुत हिम्मत बंधाई। वह कहती हैं, ‘ये एक ऐसी फिल्म है जिसने मुझे उस वक्त में हिम्मत से काम लेना सिखाया जब मैं अपने निजी जीवन के सबसे बड़े नुकसान से गुजर रही थी। भावनात्मक रूप से मैं खुद को बहुत असहाय पा रही थी और तभी मुझे ये फिल्म देखने का मौका मिला। परिवार के सदस्य कैसे एक दूसरे का सहारा बनते हैं और कैसे सोशल मीडिया के चक्कर में हम अपना समय नष्ट करते रहते हैं, इस बात का असल संकेत मुझे इस मलयालम फिल्म से ही मिला।’


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