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कोरोना किस प्रकार से स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बन रहा है, इसके कारण फिलहाल मृत्यु का जोखिम कितना है, इस बारे में शोधकर्ताओं ने एक हालिया अध्ययन में बड़ा दावा किया है। नेशनल क्लिनिकल रजिस्ट्री फॉर कोविड-19 (एनसीआरसी) द्वारा किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती करीब 6.5 फीसदी लोगों की एक साल के भीतर मौत हो गई।
यह अध्ययन कोरोना के बाद होने वाली जटिलताओं के बारे में लोगों को अलर्ट करता है।
एनसीआरसी के अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि कोरोना के बाद लोगों में कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं देखी जा रही है, जो उनमें मृत्यु के खतरे के बढ़ाने वाली हो सकती है। मृत्यु के आंकड़े युवाओं में अधिक देखे जा रहे हैं, इसमें भी पुरुषों की संख्या अधिक है। एनसीआरसी, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ही एक इकाई है, जिसने अध्ययन करके ये समझने की कोशिश की है कि एक वर्ष के बाद डिस्चार्ज लोगों में मृत्यु दर से संबंधित क्या कारक हो सकते हैं?
एनसीआरसी ने सितंबर 2020 से फरवरी 2023 तक का डेटा एकत्र किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादातर लोगों में मृत्यु का प्रमुख कारण पोस्ट कोविड कंडिशन (पीसीसी) हैं, इसमें कोऐग्युलेशन से संबंधित असमान्यताएं (रक्त के थक्का बनने की समस्या) हैं जिसके कारण कार्डियक अरेस्ट और कई अन्य प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हुई देखी गई हैं जिनके जानलेवा दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना के जोखिमों को हल्के में लेने की गलती नहीं की जानी चाहिए क्योंकि पोस्ट कोविड से संबंधित समस्याएं अब भी लोगों के लिए गंभीर दिक्कतों का कारण बन रही हैं।
कोरोना संक्रमित रहे लोगों में मौत का प्रमुख कारण हृदय से संबंधित समस्याएं हैं, इससे सबसे ज्यादा मौत के मामले रिपोर्ट किए गए हैं। इसके अलावा लंग्स फाइब्रोसिस, थ्रोम्बोएम्बोलिज़्म, किडनी और लिवर की समस्याएं हो सकती हैं। इस अध्ययन के लिए 14,419 रोगियों के डेटा का अध्ययन किया गया उनमें से 942 की अस्पताल से डिस्चार्ज के एक साल के भीतर मृत्यु हो गई, इसमें 325 महिलाएं और 616 पुरुष शामिल थे। मृतकों में से 175 (18.6 प्रतिशत) की उम्र 18-45 वर्ष थी।
हृदय रोगों के अलावा कई लोगों में किडनी और लंग्स पूरी तरह से काम करने बंद कर दिए जिसके कारण भी मृत्यु का खतरा अधिक देखा गया।
अध्ययनकर्ताओं ने बताया मृत्यु का खतरा उन लोगों में कम था जिनका टीकाकरण हो चुका था। अध्ययन में कहा गया है कि कोविड-19 संक्रमण से पहले टीकाकरण की एक खुराक भी डिस्चार्ज के बाद मृत्यु के खतरे को 60 फीसदी तक कम कर सकती है। वैक्सीन के पहले शॉट के बाद मृत्युदर को रोकने के लिए टीकाकरण की प्रभावशीलता 168-185 दिनों के बाद कम हो गई, लेकिन तब भी यह 86 प्रतिशत तक प्रभावी थी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना के नए वैरिएंट्स के जोखिमों को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है, इसमें देखे जा रहे अतिरिक्त म्यूटेशन संक्रामकता दर को काफी तेजी से बढ़ाने वाली हो सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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