[ad_1]

फिरोजपुर झिरका विधायक मामन खान।
– फोटो : फेसबुक
विस्तार
नूंह हिंसा मामले में घिरे फिरोजपुर झिरका के विधायक मामन खान ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए इस पूरे मामले की जांच निष्पक्षता से करवाने की मांग की है। याची ने कहा कि इस हिंसा पर सभी ओर से सरकार घिर चुकी है और खुद को बचाने के लिए राजनीतिक विरोधियों पर दोष मढ़ने में लगी है। ऐसे में इस मामले में जांच के लिए उच्च अधिकारियों की एसआईटी गठित की जाए।
याचिका दाखिल करते हुए मामन खान ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्हें शक है कि राजनीतिक कारणों से उन्हें नूंह हिंसा मामले में फंसाया जा सकता है। हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी 31 जुलाई को हुई थी। जिस दौरान यह पूरा प्रकरण हुआ, वह क्षेत्र में मौजूद ही नहीं थे। 26 जुलाई से एक अगस्त तक वह बाहर थे। इस मामले में जांच को हाईजैक किया जा चुका है और जांच पहले से तय की गई दिशा की तरफ बढ़ रही है। इस मामले में आगामी चुनाव में राजनीतिक लाभ पाने के लिए कांग्रेस पार्टी व इससे जुड़े लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
याची ने हाईकोर्ट से अपील की है कि इस मामले में दर्ज सभी एफआईआर की जांच एसआईटी को सौंपी जाए, जिसका मुखिया आईजी रैंक से नीचे का न हो। इसके साथ ही एसआईटी को यह आदेश दिया जाए कि वह अपनी जांच को किसी भी राजनीतिक पार्टी के नुमाइंदे से साझा न करे क्योंकि यह बेहद संवेदनशील मामला है। इसके साथ ही यह आदेश दिया जाए कि यह जांच लंबित रहते याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी कार्रवाई न की जाए। हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में दाखिल की गई इस याचिका पर जल्द सुनवाई होगी।
याचिका में यह दी गई हैं दलील
- नूंह हिंसा में सरकार की नाकामयाबी के बाद दोष विपक्ष पर मढ़ना आरंभ कर दिया गया। इस मामले में उसे जांच में शामिल होने का नोटिस दिया गया। प्रेस में गृह मंत्री का बयान आया कि याची इस मामले का मास्टरमाइंड है। याची ने कहा कि इस मामले में गृह मंत्री जांच को प्रेस में लीक कर रहे हैं और याची को फंसाने का प्रयास किया जा रहा है।
- डीसी प्रशांत पवार का उन्हें हिंसा के दौरान फोन आया था और उन्होंने गुरुकुल को बचाने के लिए सहयोग मांगा था। याची ने अपने भाई और सरपंच को इसकी रक्षा के लिए भेजा था, जिन्होंने रात तक इसे बचाए रखा।
[ad_2]
Source link