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सबसे पहले शहीद मेजर आशीष धौंचक के पार्थिव शरीर को टीडीआई स्थित उनके नए मकान पर सुबह करीब छह बजे लाया गया। इस नए मकान में मेजर आशीष को अपने जन्मदिन पर 23 अक्टूबर को गृह प्रवेश करना था। ऐसे में परिजनों की इच्छा से शव को पहले टीडीआई स्थित नए मकान पर लाया गया, जहां मां कमला, पिता लालचंद, पत्नी ज्योति समेत तीनों बहनों ने मेजर आशीष के पार्थिव शरीर को गले लगाया।
यहां श्मशान घाट में उनको राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इससे पहले परिजनों के साथ ही सेना के अधिकारियों, प्रशासन व पुलिस अधिकारियों ने उनको पुष्प चक्र भेंट किया। पत्नी ज्योति और बेटी वामिका समेत परिवार के लोगों ने उनको सैल्यूट किया।
मां की पीड़ा … बुलेट प्रूफ जैकेट बड़ी हो
शहीद की मां कमला जहां बेटे को खोने का अपार गम समेटे हुई थी, वहीं उसके चेहरे पर देश के लिए बेटे की शहादत पर गर्व और संतोष के भाव साफ नजर आ रहे थे। एक पल मानों गम से उनका कलेजा निकल आता तो अगले पल वह खुद पर काबू कर संतोष करती। बेटे को अंतिम विदाई देते हुए उन्होंने कहा कि जय किसान, जय जवान, मेरा बेटा देश की शान, मेरा बेटा अमर रहे। मेरा बेटा देश पर कुर्बान। उन्होंने कहा कि मैंने बेटा देश को सौंप दिया था। सरकार बुलेट प्रूफ जैकेट लंबी दे तो कई जवानों की जान बच सकती है। वहीं बेटे की शहादत पर गम और गर्व के साथ उन्होंने सवाल भी उठाए कि आखिर सरकार अब क्या कर रही है। उनका यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
मेजर आशीष अमर रहे और भारत माता के लगे जयकारे
टीडीआई से गांव बिंझौल तक शहीद मेजर आशीष अमर रहे और भारत माता की जय के नारे लगाए गए। युवा मोटरसाइकिल पर तिरंगा लेकर आगे चले। गोहाना मोड़ जीटी रोड से सेना के विशेष वाहन के आगे काफिले के रूप में चले और श्मशान घाट तक मोटरसाइकिलों का काफिला लगा रहा। गांव में प्रवेश से श्मशान घाट तक फूलों की वर्षा की गई। ग्रामीण बच्चों महिलाओं व बुजुर्गों ने अपने लाल को भावभीनी विदाई दी।
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