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MP Election 2023
– फोटो : Amar Ujala
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समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की सोशल मीडिया पर मिर्ची बाबा उर्फ राकेश दुबे के साथ मुलाकात की एक तस्वीर खूब वायरल हो रही है। यादव ने मिर्ची बाबा को एमपी की एक प्रमुख सीट से चुनावी मैदान में उतरने के लिए शुभकामनाएं भी दी है। जैसे ही अखिलेश ने यह शुभकामना दी इसके बाद पूरे राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि क्या मिर्ची बाबा चुनावी मैदान में उतरने जा रहे है।
कुछ लोगों का कहना है कि बाबा सीएम शिवराज के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे, जबकि कुछ का कहना है कि वह कमलनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ सकते है। हालांकि, इस पूरे मामले में अब तक मिर्ची बाबा की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। प्रदेश की सियासत में चर्चा का केंद्र बने आखिर ये मिर्ची बाबा कौन हैं? कैसे उन्होंने ऑयल मिल मजदूर से महामंडलेश्वर तक का सफर तय किया? आइये जानते है…
कैसे बने मिर्ची बाबा?
मिर्ची बाबा उर्फ राकेश दुबे मध्य प्रदेश के भिंड जिले के बिरखड़ी गांव के रहने वाले हैं। इनके पिताजी आयोध्या के पास मालनपुर के एक मंदिर में पुजारी थे। 1997 में मिर्ची बाबा केवल आयल मिल मजदूरी का काम करते थे। बाद में गांव की जमीन बेचकर ट्रक खरीद लिया। इसमें भी घाटा हो गया, तो वह भी बेच दिया। इसके बाद प्रदेश छोड़कर गुजरात चल दिए। वहां अहमदाबाद में एक प्राइवेट मिल में काम करने लगे। यहीं से वे किसी संत के संगत में आ गए। इसके बाद राकेश दुबे ने संन्यास लिया है। इसके बाद वे वैराग्य नंद गिरी हो गए। धीरे धीरे एमपी के गांवों में उनकी ख्याति बढ़ने लगी। स्वामी वैराग्यानंद गिरी की खास बात यह थी कि वह अपने भक्तों को मिर्ची की धूनी देते थे। इससे ही उनका नाम मिर्ची बाबा नाम पड़ा। बाबा व्यासपीठ पर बैठकर भागवत भी करने लगे। ख्याति की वजह से लोग उन्हें बुलाते थे।
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