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Pollution
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
विस्तार
दिल्ली इस समय गंभीर प्रदूषण झेल रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार बुधवार को दिल्ली के आनंद विहार में प्रदूषण का स्तर 419 है, जो एक समय 500 तक पहुंच गया था। आईटीओ पर प्रदूषण का स्तर 354, जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम पर 364 और लोदी रोड पर 342 तक पहुंच गया है। आने वाले समय में प्रदूषण के स्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है। इस प्रदूषण का एक बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं, फसलों की पराली जलना और जीवाश्म ईंधन से चलने वाली मशीनें हैं। यदि इनके स्थान पर सौर ऊर्जा संचालित उपकरणों का उपयोग किया जाये और लोगों के घरों को बिजली के पारंपरिक स्रोतों की बजाय सौर ऊर्जा संचालित उपकरणों का उपयोग किया जाये, तो इस प्रदूषण से बहुत हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।
दिल्ली में इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए) की 30-31 अक्तूबर को हुई दो दिवसीय बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि अब सौर ऊर्जा के बड़े संयंत्रों की स्थापना में 35 फीसदी तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। अभी तक यह मदद परियोजना लागत की 10 फीसदी सीमा तक निर्धारित थी। आईएसए का अनुमान है कि उसकी इस योजना से सदस्य देशों में सौर ऊर्जा के उपभोग को बढ़ावा मिलेगा, इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और वातावरण को साफ रखने में मदद मिलेगी।
लक्ष्य
आईएसए अपने मिशन 1000 से प्रेरित है। इसके अंतर्गत उसका लक्ष्य है कि 2030 तक 100 करोड़ लोगों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराई जाए। 1000 अरब डॉलर के निवेश से 1000 गीगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन कर प्रति वर्ष 1000 मिलियन टन कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्पादन में कमी लाना है। संगठन का अनुमान है कि 2030 तक कुल वैश्विक ऊर्जा आवश्यकता का 65 फीसदी और 2050 तक कुल ऊर्जा आवश्यकता का लगभग 90 फीसदी सौर ऊर्जा से हासिल किया जा सकता है। यदि यह लक्ष्य हासिल किया जा सके तो इससे न केवल प्रदूषण लेवल को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि लोगों को ज्यादा सस्ती और सुलभ बिजली उपलब्ध कराना संभव हो सकेगा।
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