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चमत्कार… जिंदगी की पिच पर हो या खेल के मैदान में… सबकुछ बदलकर रख देता है… जैसे कि मैक्सवेल ने बदल दिया… और जिसे भी चमत्कार पर यकीन ना हो उसे ग्लैन मैक्सवेल की वह पारी देखनी चाहिए…, वर्ल्ड कप 2023 में अफगानिस्तान के खिलाफ खेली गई इस पारी ने क्रिकेट इतिहास में 7 अक्टूबर 2023 को अमर कर दिया…जब भी इस तारीख का जिक्र होगा तो सामने पीली जर्सी में एक बल्लेबाज दिखेगा, जिसने पैरों से लेकर कमर तक में हुए खिंचाव के बाद भी ऐसी पारी खेल दी, जिसपर लगभग सभी दिग्गजों का एक ही जवाब है… मैंने ऐसी पारी नहीं देखी…
एक खिलाड़ी अगर ठान ले तो वह कैसे पूरी टीम पर भारी पड़ सकता है, यह ग्लैन मैक्सवेल ने दिखाया. अफगानिस्तान के खिलाफ नौवें ओवर में जब ग्लैन मैक्सवेल बैटिंग करने उतरे तब ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 4 विकेट पर 49 रन था. अजमतुल्लाह लगातार 2 गेंद पर विकेट ले चुके थे. यानी मैक्सवेल पर हैट्रिक बचाने का दबाव था. वे पहली गेंद पर बाल-बाल बचे. क्योंकि गेंद उनके बल्ले का किनारा लेकर विकेट के पीछे तो गई लेकिन विकेटकीपर के ठीक सामने गिर गई.
यह तो रही पहली गेंद, जिसका सामना मैक्सवेल ने किया. अगर हम मैक्सवेल की आखिरी 4 गेंदों की बात करें तो इनमें से 3 छक्के थे और एक चौका. आखिरी शॉट विनिंग शॉट था, जिसने उनका दोहरा शतक भी पूरा किया. इस तरह वे दुनिया के ऐसे पहले बैटर बन गए, जिसने रन चेज करते हुए दोहरा शतक बनाया है. वे ऐसे पहले बैटर बन गए, जिसने ओपनर ना होकर भी दोहरा शतक लगाया है.
लेकिन अगर सचिन तेंदुलकर कह रहे हैं कि मैक्सवेल ने जो पारी खेली, यह उनकी देखी गई सबसे बेहतरीन वनडे पारी है. या रवि शास्त्री कह रहे हैं कि मैक्सवेल की इस पारी ने उन्हें कपिल की पारी की याद दिला दी. याद रखिए सुनील गावस्कर हर मंच पर कह चुके हैं उन्होंने वनडे मे जितनी भी भी पारी देखी है उनमें कपिल देव की पारी बेस्ट है. यानी रवि शास्त्री कपिल की जिस पारी की बात कर रहे हैं वह दुनिया की बेस्ट ईनिंग है.
एक कहावत है धागा खोलना. सही मायने में मैड मैक्सी के तूफान ने वानखेड़े स्टेडियम में अफगानिस्तान बॉलिंग लाइन का धागा खोल दिया. हम भी जरा उनकी पारी का धागा खोलकर समझते हैं कि यह क्यों सबसे महान वनडे ईनिंग कही जा रही है.
दरअसल, जब ग्लेन मैक्सवेल जब बैटिंग करने उतरे तो ऑस्ट्रेलिया की टीम लड़खड़ा चुकी थी. अफगान गेंदबाजों के सामने कंगारू दुबके हुए थे. चार रन पर पहला विकेट गंवाने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम 50 रन बनने से पहले 4 विकेट गंवा चुकी थी. उसने 69 रन पर पांचवां, 87 रन पर छठा और 91 रन पर सातवां विकेट गंवा दिया था. हताश निराश ऑस्ट्रेलियन फैंस स्टेडियम से बाहर निकलने लगे थे. और हम मीडियाकर्मी ऑस्ट्रेलिया की हार की एडवांस स्टोरी बनाने में जुट गए थे.
लेकिन अति उत्साह या निराशा में लोग भूल गए कि क्रिकेट का मैदान तो चमत्कारों के लिए भी जाना जाता है. मैक्सवेल ने यही चमत्कार दिखाया. उन्होंने अपनी अद्भुत और अकल्पनीय पारी से ना सिर्फ ऑस्ट्रेलिया को हार से बचाया बल्कि अपना नाम डबल सेंचुरी बनाने वाले चुनिंदा बैटर्स में भी शुमार करा लिया. ग्लेन मैक्सवेल ने 128 गेंद पर नाबाद 201 रन की पारी खेली. इस पारी में 21 चौके और 10 छक्के शामिल रहे.
लेकिन कहते हैं ना कि नंबर्स ऑलवेज लाइज. आंकड़े भी भी सच नहीं बताते. सच तो यह है कि मैक्सवेल जब 147वां रन दौड़ रहे थे तब उनके पैर में क्रैंप आ गया. वे रन पूरा करते ही मैदान पर लेट गए. ऑस्ट्रेलियन फीजियो मैदान पर आए. फीजियो ने कुछ इलाज किया, एक्सरसाइज करवाई, लेकिन मैक्सवेल खड़े नहीं हो पा रहे थे. तब उनकी जगह लेने के लिए मैदान पर एडम जंपा आने लगे. लेकिन मैक्सवेल ने जंपा को पैवेलियन लौटा दिया. जैसे कह रहे हों- मैं खेलेगा…
अफगान गेंदबाजों के लिए यह मौका था कि मैक्सवेल को और तंग करें. बॉडीलाइन अटैक से या फिर गेंद को उनकी रीच से दूर फेंककर. यकीनन अफगान बॉलर्स ने अपने टैलेंट के मुताबिक वह किया भी. लेकिन मैड मैक्सी ने दर्द को खुद पर हावी नहीं होने दिया. वे शॉट्स लगाते रहे. तब भी जब वे ठीक ढंग से या पूरे संतुलन से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे. वो ना तो दौड़ने की स्थिति में थे और खेलते वक्त उनके पांवों में ज्यादा मूव था.
अगर यह कहा जाए कि मैक्सवेल ने क्रीज पर खड़े-खड़े ही इतिहास बनाया तो गलत नहीं होगा. क्योंकि उन्होंने अपने दोहरे शतक के आखिरी 100 रन दर्द से जूझते हुए और लगभग बिना दौड़े पूरे किए. मैक्सी ने अपनी पारी में पहले सौ रन में 10 चौक्के और 3 छक्के लगाए. इसके बाद के 101 रन में मैक्सवेल ने 7 छक्के और 11 चौक्के लगाए.
मैक्सवेल की यह पारी सही मायने में विध्वंसक थी. उन्होंने विकेट के सामने तो छक्के लगाए ही. लेकिन पीछे भी उतने ही खूबसूरत शॉट खेले. फ्लिक से भी छक्का लगाया और रिवर्स शॉट से भी छक्का लगाया. एबी डिविलियर्स के 360 डिग्री बैटर का ताज भारतीय फैंस ने सूर्यकुमार यादव को दे रखा है, लेकिन मैक्सवेल ने बताया कि उनके रहते किसी और को 360 डिग्री बैटर कहना ज्यादती है. नाइंसाफी है.
और थोड़ी सी बात कपिल देव की उस पारी की भी कर लेते हैं, जिससे मैक्सवेल के इस दोहरे शतक की तुलना हो रही है. कपिल देव ने 1983 के वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ 138 गेंद पर 175 रन की पारी खेली थी. यह उस वक्त वनडे क्रिकेट की सबसे बड़ी पारी थी. वह भारत के लिए करो या मरो का मैच था. मैच हारने पर भारत सेमीफाइनल की रेस से बाहर हो जाता. कपिल देव जब बैटिंग करने आए तो भारत का स्कोर 17 रन पर 5 विकेट था. कपिल देव यहां से भारत का स्कोर 266 रन तक ले जाते हैं. भारत यह मैच जीतकर सेमीफाइनल में जगह बनाता है… जब कपिल देव यह पारी खेलते हैं तो वह वनडे क्रिकेट का शैशव काल था. वनडे क्रिकेट तब टीनएजर भी था. जबकि मैक्सी की यह ईनिंग टी20 क्रिकेट के युग में आई है. और भी बहुत बातें हैं, जिसे एक लेख में समेट पाना मुश्किल है…

हम तो यही कह सकते हैं कि क्रिकेट फैंस के लिए यह दुर्भाग्य की बात है कि भारत और जिम्बाब्वे के उस मैच के दिन ब्रॉडकास्टर्स हड़ताल पर थे, जिसके कारण कपिल देव की पारी रिकॉर्ड नहीं हो पाई. ऐसे में कपिल देव की पारी से मैक्सवेल की पारी की तुलना बड़ी मुश्किल हो जाती है. स्कोर कार्ड के आंकड़े तो हम सबके सामने है. लेकिन मैदान के हालात की बात कौन करेगा. शायद इसका असली हक उसी को है, जिसने कपिल देव और ग्लेन मैक्सवेल दोनों की पारियां देखी हैं. आपको क्या लगता है. कपिल देव या मैक्सवेल… किसकी पारी को बेस्ट कहा जाना चाहिए. हमें कॉमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा.
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Tags: Glenn Maxwell, Kapil dev, World cup 2023
FIRST PUBLISHED : November 8, 2023, 19:55 IST
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