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आज का शब्द: चिंतन और भारत भूषण की कविता- लो एक बजा दोपहर हुई

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आज का शब्द: चिंतन और भारत भूषण की कविता- लो एक बजा दोपहर हुई

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                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- चिंतन, जिसका अर्थ है- बार-बार होने वाला स्मरण, ध्यान, भावना, विचार, गौर। प्रस्तुत है भारत भूषण की कविता- लो एक बजा दोपहर हुई
                                                                 
                            

लो 
एक बजा दोपहर हुई 
चुभ गई हृदय के बहुत पास 
फिर हाथ घड़ी की 
तेज सुई 

पिघली सड़कें झरती लपटें 
झुँझलाईं लूएँ धूल भरी 
किसने देखा किसने जाना 
क्यों मन उमड़ा क्यों 
आँख चुई 

रिक्शेवालों की 
टोली में पत्ते कटते पुल के नीचे 
ले गई मुझे भी ऊब वहीं कुछ सिक्के मुट्ठी में भींचे 
मैंने भी एक दाँव खेला, इक्का माँगा पर 
पर खुली दुई 

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6 घंटे पहले

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