[ad_1]
नई दिल्ली. कृष्णमाचारी श्रीकांत (Krishnamachari Srikkanth) ऐसे बल्लेबाज रहे जिन्होंने एक हद तक वीरेंद्र सहवाग से पहले भारतीय टेस्ट क्रिकेट के मिजाज को बदला. धीमी बैटिंग के कारण बोरिंग होते टेस्ट क्रिकेट को उन्होंने रोमांचक बनाया. वर्ष 1983 की वर्ल्डकप विजेता भारतीय टीम के सदस्य श्रीकांत क्रीज पर आते ही ताबड़तोड़ बैटिंग करते थे. हालांकि वे तकनीकी तौर से मजबूत नहीं थे लेकिन किसी अच्छी गेंद को भी बाउंड्री के बाहर भेजने में सक्षम थे. अपनी बिंदास शैली की बैटिंग से उन्होंने क्रिकेटप्रेमियों का खूब मनोरंजन किया. ज्यादातर मौकों पर उन्होंने महान सुनील गावस्कर के साथ पारी की शुरुआत की. क्रीज के एक छोर पर ‘सनी’ जैसे क्लासिक बैटर और दूसरे छोर पर श्रीकांत जैसे गैर परंपरागत शैली के बैटर को देखना फैंस के लिए अलग ही अनुभव होता था.
21 दिसंबर 1959 को मद्रास (अब चेन्नई) में जन्मे श्रीकांत की बैटिंग ‘हैंड-आई कोआर्डिनेशन’का बेहतरीन मिश्रण थी. गेंद को जल्दी देखकर वे शॉट खेलने में कुशल थे. उनकी बैटिंग को लेकर महान हरफनमौला पाकिस्तान के तेज गेंदबाज इमरान खान ने एक बार कहा था कि श्रीकांत कब किस गेंद पर क्या शॉट खेल जाएं, कह नहीं सकते. कभी वे बहुत अच्छी बॉल को बाउंड्री के बाहर छक्के लिए भेजते हैं तो कभी बेहद खराब गेंद पर आउट हो जाते हैं. वनडे क्रिकेट में भी उन्होंने भारत के लिए कई वर्षों तक पॉवरप्ले में स्कोर को गति देने की जिम्मेदारी निभाई.
आईपीएल में जमकर लुटा पैसा, ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों का जमकर चला सिक्का
हालांकि इन खूबियों के बावजूद श्रीकांत बैटिंग में वह क्रेडिट हासिल नहीं कर सके जिसके वे हकदार थे. इसका कारण था उनकी लापरवाह अप्रोच. ‘चीका के नाम से लोकप्रिय श्रीकांत टीम की जरूरत के अनुसार बैटिंग के ‘टोन’ को नहीं बदलते थे और कई बार मुश्किल स्थितियों में लापरवाही से खेलकर विकेट गंवा देते थे.
मुंबई ने खरीदे कितने खिलाड़ी, हार्दिक पंड्या को मिलेगी कैसी टीम, पूरी लिस्ट
श्रीकांत के करियर से जुड़ी खास बातें
वेस्टइंडीज के खिलाफ लॉर्ड्स में 1983 में हुए वर्ल्डकप के फाइनल में क्रिस श्रीकांत सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे.उन्होंने 57 गेंदों में 7 चौकों और एक छक्के की बदौलत 38 रन की पारी खेली थी.1985 में मेलबर्न के मैदान में पाकिस्तान के खिलाफ बेंसन एंड हेजेस वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ क्रिकेट के फाइनल में उन्होंने 67 रनों की पारी खेली. इसमें छह चौके और दो छक्के शामिल थे.भारत के यह मैच आठ विकेट से जीता था.
खेल के प्रति लापरवाही भरे अप्रोच के कारण श्रीकांत अपने डेब्यू टेस्ट में अजीबोगरीब तरीके से रनआउट हुए थे. वानखेड़े पर इंग्लैंड के खिलाफ इस मैच में श्रीकांत दूसरी पारी के दौरान गेंद को खेलने के बाद क्रीज से आगे निकल आए जबकि गेंद ‘डेड’ नहीं हुई थी. ऐसे में इंग्लैंड के एम्बुरी ने उन्हें रन आउट कर दिया. इस गैरजिम्मेदाराना तरीके से रन आउट होने के लिए श्रीकांत, लोगों की हंसी का पात्र बन गए थे.
कप्तान के तौर पर बड़ी उपलब्धि श्रीकांत के नाम पर है. उनके नेतृत्व में भारत को वर्ष 1989-90 में पाकिस्तान के खिलाफ,उसी के मैदान पर चार टेस्ट मैच की सीरीज ड्रॉ रखने में सफलता मिली थी. पाकिस्तान की उस समय की टीम में जावेद मियांदाद, इमरान खान, वसीम अकरम और वकार यूनुस जैसे धाकड़ खिलाड़ी थे और माना जा रहा था कि भारत यह सीरीज अच्छे खासे अंतर से हारेगा.
इंजीनियरिंग ग्रेजुएट श्रीकांत ने 1981 से 1992 तक भारत के इंटरनेशनल क्रिकेट खेला. इस दौरान वो 146 वनडे मैचों का हिस्सा बने. उन्होंने 4 शतक और 27 अर्धशतक की मदद से इस फॉर्मेट में 4,091 रन बनाए. 43 टेस्ट में 29 के औसत से 2062 रन भी उन्होंने बनाए जिसमें दो शतक और 12 अर्धशतक शामिल रहे. क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद चीफ सिलेक्टर भी रहे.
.
Tags: Cricket, On This Day, Team india
FIRST PUBLISHED : December 20, 2023, 14:38 IST
[ad_2]
Source link