[ad_1]
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- शैशव, जिसका अर्थ है- शिशु संबंधी, बच्चों की अवस्था से संबंधित। प्रस्तुत है महादेवी वार्मा की कविता- विश्व-जीवन के उपसंहार!
विश्व-जीवन के उपसंहार!
तू जीवन में छिपा, वेणु में ज्यों ज्वाला का वास,
तुझ में मिल जाना ही है जीवन का चरम विकास,
पतझड़ बन जग में कर जाता
नव वसंत संचार!
मधु में भीने फूल प्राण में भर मदिरा सी चाह,
देख रहे अविराम तुम्हारे हिमअधरों की राह,
मुरझाने को मिस देते तुम
नव शैशव उपहार!
कलियों में सुरभित कर अपने मृदु आँसू अवदात,
तेरे मिलन-पंथ में गिन गिन पग रखती है रात,
नवछबि पाने हो जाती मिट
तुझ में एकाकार!
क्षीण शिखा से तम में लिख बीती घड़ियों के नाम,
तेरे पथ में स्वर्णरेणु फैलाता दीप ललाम,
उज्ज्वलतम होता तुझसे ले
मिटने का अधिकार।
आगे पढ़ें
8 घंटे पहले
[ad_2]
Source link