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नई दिल्ली. क्रिकेट का खेल करीब 15-20 साल पहले की तुलना में अब काफी बदल चुका है. टी20 क्रिकेट के आगमन के साथ आज हर टीम में ऐसे प्लेयर्स की अहमियत बढ़ गई है जो बैटिंग-बॉलिंग और फील्डिंग तीनों ही विधाओं में निपुण हों. खेल में बढ़ रही प्रतिद्वंद्विता के इस दौर में कई खिलाड़ी ऐसे भी हैं जिन्होंने बॉलर के तौर पर करियर की शुरुआत की और बाद में बैटर के तौर पर नाम कमाया, इसी तरह कई खिलाड़ी ऐसे भी हैं जिन्होंने बल्लेबाज के तौर पर खेल करियर की शुरुआत की और वक्त गुजरने के साथ बेहतरीन बॉलर या आला ऑलराउंउर के तौर पर पहचान बनाई.
बैटर के तौर पर शुरुआत करके गेंदबाजी में ऊंचाई छूने वाले इन प्लेयर्स में कुछ भारतीय प्लेयर भी शामिल हैं. नजर डालते हैं, ऐसे प्लेयर्स पर..
अजीत आगरकर : मुंबई के अजीत आगरकर (Ajit Agarkar) की गिनती वनडे फॉर्मेट के देश के बेहतरीन गेंदबाजों में की जाती है. भारत के लिए वनडे में सबसे कम मैचों में 50 विकेट लेने वाले आगरकर इस समय चीफ सिलेक्टर हैं. अजीत ने जूनियर लेबल पर रनों का अंबार लगाकर बैटर के तौर पर धाक जमाई थी. मशहूर कोच रमाकांत अचरेकर के शागिर्द अजीत ने इंटर स्कूल जाइल्स शील्ड (U-16) टूर्नामेंट में तिहरा शतक भी जड़ा. इस समय उनकी पहचान ऐसे बैटर की थी जो नेट्स पर अच्छी बॉलिंग भी कर लेता था. समय गुजरने के साथ ‘बैटर अजीत’ पीछे छूटता गया और ‘बॉलर अजीत’ आगे आता गया. अजीत के अनुसार, ‘कांगा लीग के एक मैच में मैंने बॉलिंग करते हुए कुछ विकेट लिए थे. सचिन तेंदुलकर भी यह मैच देख रहे थे. मास्टर ब्लास्टर ने मेरे कप्तान से जाकर कहा था कि इस लड़के को ज्यादा गेंदबाजी करनी चाहिए. इसके बाद से मेरे करियर की दिशा बदल गई.’
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अजीत का प्रयास ऑलराउंडर के तौर पर टीम में जगह बनाने का था लेकिन वे खालिस बॉलर ही बनकर रह गए. वे ऐसे बॉलर रहे जो छोटे रनअप में ही अच्छी खासी गति हासिल कर लेते थे. इंटरनेशनल लेबल पर उन्होंने लॉर्ड्स मैदान पर टेस्ट शतक लगाने की उपलब्धि भी हासिल की लेकिन बतौर बैटर उनके रिकॉर्ड उल्लेखनीय नहीं हैं. इस दुबले-पतले क्रिकेटर ने 26 टेस्ट मैचों में 58 विकेट लेने के अलावा 571 रन (औसत 16.79) बनाए. 191 वनडे में 288 विकेट (औसत 27.85) और 4 टी20I में तीन विकेट (औसत 28.33) भी आगरकर के नाम पर दर्ज हैं. वनडे में सबसे तेज अर्धशतक बनाने वाले भारतीय बैटर का रिकॉर्ड इस समय अजीत के ही नाम पर है, उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ 21 गेंदों पर ऐसा किया था.
आर अश्विन ने जूनियर स्तर पर कई बार तमिलनाडु की पारी की शुरुआत की. Ravichandran Ashwin/Instagram
रविचंद्रन अश्विन : 17 सितंबर 1986 को मद्रास (अब चेन्नई) में जन्मे आर अश्विन (Ravichandran Ashwin) टेस्ट क्रिकेट में अनिल कुंबले के बाद भारत की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं लेकिन उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बैटर के तौर पर की थी. जूनियर स्तर पर उन्होंने कई बार तमिलनाडु टीम के ओपनर का रोल भी निभाया. वक्त गुजरने के साथ उनका रुझान ऑफ स्पिन की ओर बढ़ता गया और बैटिंग पीछे छूटती गई. वैसे टेस्ट क्रिकेट में लगाए पांच शतक आज भी अश्विन की बल्लेबाजी प्रतिभा को बयां करते हैं. 37 वर्षीय अश्विन की गितनी भारत ही नहीं, मौजूदा समय के दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ऑफ स्पिनरों में की जाती है. 95 टेस्ट में 23.69 के औसत से 490 विकेट और 116 वनडे में 33.20 के औसत से 156 विकेट वे ले चुके हैं. 65 टी20I में 72 विकेट भी अश्विन के नाम पर दर्ज हैं.
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रवींद्र जडेजा घरेलू क्रिकेट में तीन दोहरे शतक बना चुके हैं. (AFP)
रवींद्र जडेजा : गुजरात के रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) की गिनती विश्व क्रिकेट में बॉलिंग ऑलराउंडर के रूप में होती है. हालांकि उन्होंने जब क्रिकेट की शुरुआत की थी तो स्थिति इसके उलट थी. उनकी गिनती बैटिंग ऑलराउंडर के तौर पर होती थी. क्रिकेट के शुरुआती दौर में ‘जड्डू’ टॉप ऑर्डर पर बैटिंग करने के साथ ही लेग स्पिन बॉलिंग करते थे. घरेलू क्रिकेट में बनाए गए तीन तिहरे शतक जडेजा की बैटिंग काबिलयत को दर्शाते हैं. वक्त गुजरने के साथ जडेजा स्पिनर के तौर पर आगे आते गए. उन्होंने पहले वनडे और फिर टेस्ट में अपनी स्पिन गेंदबाजी की लोहा मनवाया .टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट में 200 से ज्यादा विकेट वे अब तक ले चुके हैं. स्पिनर के तौर पर बेहद सटीक जडेजा ने 24.07 के बेहतरीन औसत से 275 विकेट लिए हैं जबकि वनडे में 36.07 के औसत से 220 और टी20I में 53 विकेट उनके नाम पर हैं. बैटिंग में टेस्ट में तीन शतक वे जड़ चुके हैं.
शिवम मावी: यूपी के तेज गेंदबाज शिवम मावी (Shivam Mavi) की पहचान ऐसे तेज गेंदबाज की है जो अच्छी गति से गेंद फेंकने के अलावा ‘लांग हैंडल’ का इस्तेमाल करके आतिशी स्ट्रोक भी खेल सकता है. वे भारत के लिए अब तक छह टी20 मैच खेल चुके हैं और सात विकेट ले चुके हैं. देश के अन्य युवाओं की तरह शिवम ने भी करियर की शुरुआत बैटर के तौर पर ही की थी लेकिन नोएडा के वांडरर्स क्लब के कोच फूलचंद ने इस युवा खिलाड़ी को नेट्स में बॉलिंग करते देखकर उन्हें इसी दिशा में आगे बढ़ने की सलाह दी. अच्छी कद-काठी के शिवम लगातार 140 किमी/घंटे से अधिक की रफ्तार से बॉलिंग कर सकते हैं. कोच की सलाह मानकर उन्होंने गेंदबाजी पर ज्यादा ध्यान दिया और बैट्समैन बनने की लालसा पीछे छूटती गई.
शार्दुल ठाकुर ने करियर की शुरुआत में हार्ड हिटर बैटर के तौर पर पहचान बनाई थी. (AP)
शार्दुल ठाकुर: महाराष्ट्र के पालघर में जन्मे शार्दुल ठाकुर (Shardul Thakur) की पहचान, पहले ऐसे हार्ड हिटर बैटर की थी जो गेंदबाजी भी कर सकता था. करियर की शुरुआत उन्होंने बैटर के तौर पर ही की थी और 2006 में स्कूल के एक क्रिकेट मैच में छह गेंदों पर छह छक्के जड़कर तहलका मचाया था. शार्दुल का घर मुंबई से करीब 100 किमी दूर पालघर में था लेकिन क्रिकेट में करियर बनाने की खातिर वे रोज सुबह लोकल से मुंबई जाते थे. कोच दिनेश लाड की सलाह पर उन्होंने गेंदबाजी पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया. शुरुआत में शार्दुल का वजन 80 किलो से अधिक था, तेज गेंदबाज जहीर खान के कहने पर उन्होंने इसे करीब 12 से 14 किलो कम किया और मुंबई की रणजी टीम और फिर भारतीय टीम में स्थान बनाया. मध्यम गति के गेंदबाज शार्दुल ने अब तक 11 टेस्ट में 31, 47 वनडे में 65 और 25 टी20I में 33 विकेट लिए हैं. टेस्ट मैचों में वे अब तक चार और वनडे में एक अर्धशतक लगा चुके हैं.
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Tags: Ajit Agarkar, R ashwin, Ravindra jadeja, Shardul thakur, Shivam mavi
FIRST PUBLISHED : January 3, 2024, 06:28 IST
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