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सिंगापुर-अमेरिका जैसे देशों में संक्रमण की एक और संभावित लहर को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चीन से प्राप्त जानकारियों के मुताबिक वहां पर कोरोना के कारण मौत के मामलों में तेजी से इजाफा आया है। मतलब कोरोना का ये नया वैरिएंट एक बार फिर से चिंता बढ़ाता हुआ देखा जा रहा है।
भारत में कोविड-19 के जोखिमों पर नजर डालें तो पता चलता है यहां भी दैनिक संक्रमण के मामले फिर से बढ़ रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक शनिवार को संक्रमण के 774 नए मामले सामने आए, दो लोगों को मौत हुई। देश में कोरोना के एक्टिव मामले 4100 से ऊपर बने हुए है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, JN.1 सब-वैरिएंट को हल्के में लेने की गलती नहीं की जानी चाहिए, ये भविष्य के लिए खतरनाक संकेत दे रहा है। कैसे, आइए इस रिपोर्ट में जानते हैं।
कोरोना पर अध्ययन कर रहे शोधकर्ता कहते हैं, भले ही हम कोविड-19 के साथ अभ्यस्त हो गए हैं, वैक्सीनेशन और हर्ड इम्युनिटी के चलते नए वैरिएंट्स से संक्रमण और गंभीर रोगों का जोखिम अब काफी कम हो गया है पर JN.1 की प्रकृति एक बार फिर से डरा रही है। जिस तेजी से ये दुनियाभर में बढ़ रहा है, इसको देखते हुए भविष्य के लिए खतरनाक संकेत को समझना जरूरी है।
अगर इसका प्रसार इसी गति से होता रहा तो इसके दो गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
पहला- कोरोना महामारी से अभी हमें और लंबी लड़ाई जारी रखनी पड़ेगी।
दूसरा- JN.1 का प्रसार संभावित रूप से खतरनाक नए कोविड वैरिएंट्स के लिए अनुकूल माहौल बना सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 2021 के अंत में कोरोना की घातक डेल्टा लहर के तुरंत बाद एक नया वैरिएंट सामने आया, जो इतना अधिक उत्परिवर्तित, इतना अलग था कि इसने कोरोना महामारी की ट्रेजेक्टरी (प्रक्षेप पथ) को बदल दिया। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसे ओमिक्रॉन नाम दिया गया, इसमें 30 से अधिक उत्परिवर्तन थे जो इसे मूल वायरस से काफी अलग करते थे। पिछले दो साल से अधिक समय से ये वैरिएंट लगातार म्यूटेट हो रहा है और अब JN.1 के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है अधिकांश नए वैरिएंट केवल एक या दो छोटे म्यूटेशनों के चलते एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। लेकिन 30 से अधिक अतिरिक्त उत्परिवर्तन के साथ पिरोला (ओमिक्रॉन BA.2.86 जिसके म्यूटेशन से JN.1 बना है) आनुवंशिक रूप से ओमिक्रॉन से उतना ही भिन्न है, जितना कि ओमिक्रॉन मूल कोरोनावायरस से था।
संक्षेप में समझें तो जेएन.1 हर दृष्टि से, एक गेम चेंजर हो सकता है। मीडिया रिपोर्टस में कैलिफोर्निया में स्क्रिप्स रिसर्च ट्रांसलेशनल इंस्टीट्यूट के निदेशक और कोरोना वायरस पर लगातार शोध कर रहे वैज्ञानिक डॉ. एरिक टोपोल कहते हैं, हमें जनता को सचेत करने की जरूरत है कि ये एक गंभीर वैरिएंट है जो दुनियाभर में कोरोना लहर को बढ़ावा दे सकता है, भले ही इसके कारण अस्पतालों में भीड़ पहले की तुलना में ज्यादा न हो।
मिनेसोटा विश्वविद्यालय में संक्रामक रोग अनुसंधान और नीति केंद्र (सीआईडीआरएपी) के निदेशक डॉ. माइकल ओस्टरहोम कहते हैं, जिस प्रकार से JN.1 के कारण संक्रमण की रफ्तार बढ़ रही है, ये नए वैरिएंट्स के गंभीर विकास का प्रतिनिधित्व करता है, और संकेत देता है कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है।
इजराइली वेरिएंट ट्रैकर्स ने अगस्त 2023 में JN.1 का पता लगाया था। BA.2.86 वैरिएंट भले ही बहुत खतरनाक साबित नहीं हुआ पर ये भूलना नहीं चाहिए कि ये मूल ओमिक्रॉन जैसा भी नहीं है। विशेषज्ञों का तर्क है कि JN.1 संभवतः महामारी के विकास में एक नए अध्याय का प्रतिनिधित्व करता है।
जो वैरिएंट बहुत अधिक संक्रामकता वाला होता है वो सिर्फ संक्रमण नहीं बढ़ाता, साथ ही नए म्यूटेशनों के साथ अधिक संक्रामक और घातक वैरिएंट को जन्म भी दे सकता है। महामारी की शुरुआत में अल्फा-गामा वैरिएंट्स की सबसे पहली लहर हल्के लक्षणों वाली थी, पर प्रसार काफी अधिक था, जिसके कारण डेल्टा वैरिएंट सामने आया और दुनियाभर में मौत के मामले तेजी से बढ़े थे। JN.1 वैरिएंट की तेजी से बढ़ने वाली प्रकृति भी इसी तरह से डरा रही है।
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स्रोत और संदर्भ
JN.1 is the probable future of the COVID pandemic, experts warn
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