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UP BJP First List
– फोटो : Amar Ujala/ Sonu Kumar
विस्तार
भारतीय जनता पार्टी ने 195 प्रत्याशियों की सूची शनिवार देर शाम को जारी कर दी। सूची में घोषित नाम के बाद इसको एक बार फिर से अप्रत्याशित सूची के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली की घोषित प्रत्याशियों की लिस्ट के अलावा ज्यादातर राज्यों में बहुत बड़ी छेड़छाड़ नहीं की है। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने घोषित सीटों पर सौ फ़ीसदी प्रत्याशियों का टिकट रिपीट करके यह जताया हैं कि राज्य में कोई भी एंटी इनकंबेंसी सांसदो के खिलाफ नहीं है। सियासी जानकार भी मानते हैं इसी स्ट्रेटजी के साथ भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकारों ने मनोवैज्ञानिक तौर पर भी राज्य में एक बड़ा सियासी संदेश दिया है। इसके अलावा जीतने वाले प्रत्याशियों की लाइन में ना तो उम्र का कोई संकट सामने आया और ना ही किसी तरह के विवादित मामले में टिकट कटने का कोई बैरियर लगा।
वरिष्ठ पत्रकार बृजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि दरअसल उत्तर प्रदेश में विकास के नाम पर डबल इंजन सरकार की बड़ी दुहाई देती आई है। ऐसे में अगर एक साथ बड़े टिकट काट दिए जाते तो लोगों के बीच में बना यह संदेश जाता कि जिस प्रदेश में सबसे ज्यादा विकास की और बदलाव की बात हो रही है। वहां पर अचानक बड़े स्तर पर टिकटों का बदलाव कर देना कहीं ना कहीं यह संदेश देता की अंदर खाने सब ठीक नहीं है। शुक्ल कहते हैं कि बड़े स्तर पर टिकट काटे जाने का मतलब यही होता है कि संसद या विधायक परफॉर्म नहीं कर पा रहे हैं। इसीलिए भारतीय जनता पार्टी ने न सिर्फ जिताऊ कैंडिडेट पर भरोसा जताते हुए सभी 47 सीटों पर दोबारा मैदान में उतारा। बल्कि यह संदेश दिया है कि मोदी सरकार जो कह रही है वही जमीन पर हो रहा है। उसके अलावा नेताओं के विवाद सामने आने के साथ उम्र जैसे अहम बैरियर भी विनिबिलिटी के मामले में फेल हो गए।
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