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Maldives: भारतीय पर्यटकों ने मालदीव से किया किनारा; द्वीपीय राष्ट्र का संकट बढ़ा, पर्यटन उद्योग ने की यह मांग

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Maldives: भारतीय पर्यटकों ने मालदीव से किया किनारा; द्वीपीय राष्ट्र का संकट बढ़ा, पर्यटन उद्योग ने की यह मांग

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Indian tourists shun the Maldives; industry feels the pinch: Reports

मालदीव के पर्यटन उद्योग ने सरकार के मंत्रियों पर साधा निशाना।
– फोटो : Social Media

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भारत और पड़ोसी मालदीव के बीच हाल के दिनों में जारी खटास के बीच द्वीपीय राष्ट्र में पहुंचने वाले भारतीय पर्यटकों बहुत हद तक गिर गई है। इसका असर मालदीव के पर्यटन उद्योग पर पड़ना शुरू हो गया है और मांग उठने लगी है कि भारत के साथ संबंधों को जल्द से जल्द सुधारा जाए। 2023 में मालदीव पहुचंने वाले पर्यटकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक थी, पर 2024 भारतीय पर्यटकों की संख्या छठे नंबर पर पहुंच गई है। इससे पर्यटन पर निर्भर देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

मालदीव के तीन अधिकारियों की ओर से सोशल मीडिया पर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के बाद भारत की ओर से करारा जवाब दिया गया था। बीते 6 जनवरी को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर भारत के पश्चिमी तट पर प्राचीन लक्षद्वीप के द्वीपों  की तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए थे।

मालदीव पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में 17 लाख से अधिक पर्यटकों ने द्वीप राष्ट्र का दौरा किया, जिनमें से 2,09,198 से अधिक आगंतुक भारतीय थे, इसके बाद रूसी (2,09,146) और चीन (1,87,118) थे। 2022 में भारतीय आगंतुकों की संख्या 2.4 लाख से अधिक थी, जबकि 2021 में 2.11 लाख से अधिक भारतीयों ने मालदीव के लिए उड़ान भरी। महामारी के दौरान अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए खुले कुछ देशों में मालदीव भी था और उस अवधि के दौरान लगभग 63,000 भारतीयों ने उस देश का दौरा किया।

मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है कि 2024 में पर्यटकों के आगमन के मामले में भारत छठे स्थान पर है। 2020 से मालदीव पहुंचने वाले पर्यटकों में भारतीय पर्यटकों की संख्या लगातार पहले स्थान पर रही है।  भारतीय पर्यटक महामारी के समय में भी द्वीपीय राष्ट्र का दौरा कर रहे थे। मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है 2 मार्च 2024 तक 27,224 भारतीय पर्यटक मालदीव पहुंचे, जो पिछले साल की तुलना में 33 प्रतिशत कम है, जब इस अवधि में 41,224 लोग मालदीव पहुंचे थे।

मालदीव का पर्यटन उद्योग भारत और मालदीव के बीच रिश्तों में आई ताजा खटास से चिंतित है और इस स्थिति में बदलाव की मांग कर रहा है। ऑफ-पीक सीजन के दौरान मालदीव में पर्यटन से संबंधित प्राप्तियों को बनाए रखने में भारत कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, यह बताते हुए एक समाचार पोर्टल Sun.mv ने कहा: “भारतीय यात्रियों और यूरोपीय यात्रियों के पर्यटन में एक काउंटर-ट्रैवल पैटर्न है। इसका मतलब है कि भारतीय पर्यटक गर्मी के दौरान मालदीव में अक्सर आते हैं, इस दौरान यूरोपीय पर्यटकों की संख्या में कमी आती है। दूसरे शब्दों में, भारतीय पर्यटक मालदीव के पर्यटन उद्योग के ऑफ-पीक सीजन के लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘फिलर’ है।  

न्यूज पोर्टल के अनुसार पर्यटन उद्योग के विशेषज्ञों और विश्लेषकों ने मालदीव पहुंचने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में कमी से पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को उजागर किया है। कुछ जानकारों के अनुसार वर्तमान स्थिति से द्वीपीय राष्ट्र को 1.8 बिलियन अमरीकी डॉलर से 2 बिलियन अमरीकी डॉलर के नुकसान का अनुमान है।

रिपोर्ट के अनुसार ऐसी ट्रैवल एजेंसियां और ऑपरेटर जो भारतीय पर्यटकों पर निर्भर करते हैं, अपने राजस्व में 80 प्रतिशत तक की गिरावट की बात कह रहे हैं, जो कि एक खतरनाक स्थिति है। ट्रैवल एजेंसी ‘लेट्स गो मालदीव’ के एक अधिकारी के हवाले से पोर्टल ने कहा कि मालदीव पहुंचने वाले भारतीय पर्यटक अलग-अलग वर्गों से आते हैं और ये गर्मियों के लिए एक बड़ा बाजार हैं। मालदीव के एक अधिकारी ने कहा है कि भारतीय पर्यटकों के नहीं आने से पर्यटन उद्योग के ऑक्यूपेंसी रेट में गिरावट आई है। भारत पर्यटक हमारे लिए महत्वपूर्ण बाजार हैं।

रिपोर्ट में एक प्रमुख ट्रैवल एजेंसी ट्रैवल कनेक्शन मालदीव के हवाले से कहा गया है कि सिर्फ भारतीय पासपोर्टधारकों ने ही मालदीव का बहिष्कार नहीं किया है, बल्कि समृद्ध और धनी भारतीय मूल के यात्रियों के अन्य देशों से मालदीव आने में भी गिरावट आई है। ट्रैवल कनेक्शन के सीईओ मोहम्मद मिरशाद के अनुसार यह मालदीव पर्यटन में भारतीय बाजार की महत्ता को दर्शाती है। अधिकारियों को उम्मीद है कि मालदीव में हनीमाधू अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और भारत के केरल राज्य में तिरुवनंतपुरम के बीच सीधी उड़ानों के फिर से शुरू होने से भारत से कुछ और पर्यटक वापस आएंगे।

न्यूज पोर्ट्ल Sun.mv ने कहा है कि अहंकार से हमें फायदा नहीं होगा, यह देश की संवेदनशील अर्थव्यवस्था को और भी नुकसान पहुंचाएगा। सच्चा ज्ञान अपनी कमजोरियों और शक्तियों को स्वीकार करने में निहित है, और वास्तविकता यह है कि हमें भविष्य में होने वाले किसी भी नुकसान से बचना चाहिए।

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