Home Breaking News आज का शब्द: अरि और माखनलाल चतुर्वेदी की कविता- रक्त-तर्पण भर का अभिमान

आज का शब्द: अरि और माखनलाल चतुर्वेदी की कविता- रक्त-तर्पण भर का अभिमान

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आज का शब्द: अरि और माखनलाल चतुर्वेदी की कविता- रक्त-तर्पण भर का अभिमान

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                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अरि, जिसका अर्थ है-  शत्रु, वैरी, चक्र, चक्कर, काम, क्रोध। प्रस्तुत है माखनलाल चतुर्वेदी की कविता- रक्त-तर्पण भर का अभिमान
                                                                 
                            

गिनो न मेरी श्वास, 
छुए क्यों मुझे विपुल सम्मान? 
भूलो ऐ इतिहास, 
ख़रीदे हुए विश्व-ईमान!! 
अरि-मुंडों का दान, 
रक्त-तर्पण भर का अभिमान, 
लड़ने तक महमान, 
एक पूँजी है तीर-कमान! 
मुझे भूलने में सुख पाती, 
जग की काली स्याही, 
दासो दूर, कठिन सौदा है 
मैं हूँ एक सिपाही! 

क्या वीणा की स्वर-लहरी का 
सुनें मधुरतर नाद? 
छिः! मेरी प्रत्यंचा भूले 
अपना यह उन्माद! 
झंकारों का कभी सुना है 
भीषण वाद विवाद? 
क्या तुमको है कुरु-क्षेत्र 
हलदी घाटी की याद! 
सिर पर प्रलय, नेत्र में मस्ती, 
मुट्ठी में मनचाही, 
लक्ष्य मात्र मेरा प्रियतम है, 
मैं हूँ एक सिपाही। 

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3 hours ago

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