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सस्पेंस: राहुल गांधी को लेकर दिल्ली में खामोशी, इधर अमेठी में तीन मई को नामांकन की तैयारियां हुईं शुरू

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सस्पेंस: राहुल गांधी को लेकर दिल्ली में खामोशी, इधर अमेठी में तीन मई को नामांकन की तैयारियां हुईं शुरू

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Suspense: Silence in Delhi regarding Rahul, here in Amethi, preparations for nomination started on May 3

अमेठी पहुंचे केएल शर्मा बोले तीन को होगा नामांकन।
– फोटो : अमर उजाला

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हाईप्रोफाइल सीटों में शुमार अमेठी में कांग्रेस की सियासी चुप्पी पहली बार दिख रही है। अजीब कशमकश है। प्रत्याशी का इंतजार है। कुछ के नाम पर सहमति है तो कुछ के नाम पर असहमति… इन सबके बीच अमेठी का सियासी रण दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस नेता का इंतजार अभी जस का तस है। इन सबके बीच बुधवार को यहां पहुंचे सोनिया गांधी के प्रतिनिधि किशोरी लाल शर्मा ने संदेश दिया कि किसी को हताश होने की आवश्यकता नहीं है। सभी लोग तीन मई के नामांकन की तैयारी में जुट जाएं। मतलब साफ है…अमेठी के सियासी संग्राम में आने वाले दो दिन बेहद अहम हैं।  

अमेठी गांधी परिवार की परंपरागत सीट मानी जाती है। यहां से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। भाजपा और बसपा ने अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। सांसद और केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी तीसरी बार मैदान में हैं। मगर, कयासबाजी के बीच कांग्रेस ने अभी तक पत्ते नहीं खोले हैं। दरअसल, वर्ष 2019 के चुनाव में राहुल गांधी अमेठी के साथ-साथ केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़े थे। अमेठी से हार मिली और वायनाड से जीते। इस बार भी वह वायनाड सीट से चुनावी समर में मोर्चा संभाले हैं, जहां 26 अप्रैल को मतदान संपन्न हो गया है। 

आखिर यह देरी क्यों

अभी तक कांग्रेसी दावा कर रहे थे कि 26 के बाद राहुल गांधी अमेठी आएंगे। यह बात बस कयासबाजी ही साबित हुई। अभी तक राहुल का इंतजार बना ही हुआ है। कांग्रेस के बड़े नेता दावा तो करते हैं कि राहुल चुनाव लड़ेंगे, लेकिन लाख टके का सवाल है कि जब चुनाव लड़ना है तो एलान में देरी क्यों?। 

तो यह है असल वजह

कांग्रेस के स्थानीय नेता राहुल को लेकर असमंजस में हैं। कुछ का तर्क है कि वायनाड के बाद राहुल गांधी अमेठी से चुनाव नहीं लड़ना चाहते। इसका अहम कारण है कि जीत के बाद आखिर वह किस सीट को छोड़ेंगे। वायनाड के लोगों ने उस समय साथ दिया जब अमेठी से उन्हें हार मिली थी। ऐसे में वायनाड लोकसभा सीट छोड़ना राहुल गांधी के लिए मुश्किल है और अमेठी गांधी परिवार की परंपरागत सीट रही है। चाचा संजय गांधी से लेकर पिता राजीव गांधी और मां सोनिया गांधी तक प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। एक और बड़ा कारण है, अमेठी लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी स्मृति जूबिन इरानी एक बार फिर से मैदान में हैं। राहुल गांधी अगर अमेठी से दोबारा चुनाव हारते हैं तो इसका संदेश राजनीतिक तौर पर गलत जाएगा। उत्तर भारत की राजनीति में राहुल के लिए सियासी राह इसके बाद मुश्किल हो जाएगी। 

कई दौर की बैठक, नाम पर चुप्पी

गौरीगंज के केंद्रीय कांग्रेस कार्यालय में बुधवार को हलचल रही। सुबह ही सोनिया गांधी के प्रतिनिधि किशोरी लाल शर्मा सहित रायबरेली में काम कर रही उनकी टीम कार्यालय पहुंच गई। अलग-अलग चरणों में बैठक हुई। फ्रंटल से लेकर ब्लॉक स्तर तक के पदाधिकारियों से बात हुई। बंद कमरे में हुई बैठक के बाद बाहर निकले नेताओं का बस सिर्फ इतना ही कहना था कि शुक्रवार को नामांकन होगा। प्रत्याशी कौन, इसपर जवाब था कि जिसे आप चाहते हैं, वही आ रहा है। 

नामांकन की तैयारी शुरू

कांग्रेस के मीडिया प्रभारी अनिल सिंह कहते हैं कि हमें उम्मीद है कि राहुल गांधी ही यहां से चुनाव लड़ेंगे। शुक्रवार को नामांकन होना है, जिसे लेकर तैयारी तेज कर दी गई है। नामांकन जुलूस में इस बार अमेठी के परंपरागत लोक नृत्यों को भी शामिल किया जा रहा है। 

पूर्व एमएलसी दीपक सिंह कहते हैं कि कार्यकर्ता पूरी ताकत के साथ तैयारी कर रहे हैं। कहीं कोई संशय नहीं है। शुक्रवार को नामांकन होना है। इसके लिए रणनीति तैयार की गई है।  

लोकसभा चुनाव के लिए बनाए गए मीडिया समन्वयक डॉ. अरविंद चतुर्वेदी कहते हैं कि तीन मई को नामांकन है। चार को प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय आ रहे हैं, जिसे लेकर तैयारी की जा रही है। बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर दिया गया है। 

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