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कोकिलाबेन अंबानी अस्पताल के ठीक पास में बने सिन्टा भवन की दूसरी मंजिल इस बार ठहाकों से गुलजार रही। भारत में अपनी तरह के पहले कॉमेडी स्केच शो ‘शुगरकोटेड करेला’ में कोई डेढ़ दर्जन कलाकारों ने पांच प्रहसन प्रस्तुतियों से दर्शकों का खूब मनोरंजन करने का प्रयास किया। निर्देशक नीलतरणी प्रताप और शो रनर कृष्ण हुड्डा की इस मिली जुली कोशिशों में सामाजिक व्यवस्था पर खूब तंज कसे गए। इन पांचों प्रहसनों में सबसे ज्यादा तालियां मिलीं ‘एयर कॉन’ को और कोटा में छात्रों की आत्महत्या पर बने व्यंग्य ‘डेड स्टूडेंट सोसाइटी’ ने भी लोगों को खूब झकझोरा।
अरनव केडिया, प्रसाद बोरकर, सॉरिन देसाई और विशाल अग्रवाल के लिए नाटकों से सजी ये शाम पहले प्रहसन ‘डेड स्टूडेंट सोसाइटी’ से शुरू हुई। कॉमेडी स्केचेज का ये शो कुछ कुछ पुअर थियेटर जैसा ही है, जिसमें सब कुछ कलाकारों को अपने शारीरिक हावभाव दिखाकर ही करना होता है। पंखा हो या ड्रम सब कुछ यूं निखारना होता है कि दर्शकों को लगे अमुक चीज वाकई मंच पर मौजूद है। कहानी कोटा में छात्रों के बार बार आत्महत्या करने की घटनाओं से प्रेरित है और तंज है सीधे सीधे उनसे कोचिंग संचालकों पर जिनका पूरा ध्यान पैसे पर है, बच्चों की जान की उन्हें कोई परवाह ही नहीं।
‘शुगरकोटेड करेला’ में इस हास्य प्रहसन के अलावा सबसे ज्यादा लोगों को ‘एयर कॉन’ की प्रस्तुति पसंद आई। बीच में ‘दिल रुबा दिल टूटा’, ‘ब्राउन ब्लड’ और ‘डोंट माइंड द गैप’ के कलाकार भी दर्शकों को हंसाने की कोशिश करते रहे। लेकिन, ‘एयरकॉन’ से दर्शकों का रिश्ता सीधे बनता दिखाई दिया। सीट सेलेक्शन से लेकर खाने पीने के सामान तक हर चीज पर टिकट की फीस के अलावा पैसे वसूल करने के एयरलाइंस के बढ़ते चलन को इस प्रहसन ने बहुत सटीक तरीके से दर्शाया। नाटक के उस हिस्से पर तो पूरा वेदा कुनबा थियेटर ठहाकों से गूंज उठा जब यात्री के दीर्घशंका जाने पर एयर होस्टेस ने वजन के हिसाब से सेवा शुल्क तय कर दिया।
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